भारत गगनयान के जरिए अपने अंतरिक्षयात्री व्योमनॉट को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है. इसी बीच इसरो ने एक नया ऐलान किया है. इसरो के चेयरमैन के.सिवन ने बताया कि गगनयान हमारा एकमात्र ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम नहीं होगा, बल्कि भविष्य में व्योमनॉट को अंतरिक्ष में भेजने के प्रोग्राम जारी रहेंगे. फिलहाल गगनयान को अंतरिक्ष में ले जाने वाले रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 पर तिरुवनंतपुरम के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में काम हो रहा है. इसी के साथ अंतरिक्ष यात्रियों के चयन और शुरुआती प्रशिक्षण का काम एयरफोर्स के इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन में जारी है. बता दें कि इन चुने गए उम्मीदवारों को रूस भेजना पड़ता है.

जिसपर करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं. लेकिन भविष्य में इसकी सुविधाओं के लिए रणनीति तैयार की जा चुकी है. बता दें कि भारत भी अब अपना ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर बनाने जा रहा है. इसके साथ ही भारत ऐसा छठा देश बना जाएगा जिसके पास अपना ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर होगा. बता दें कि अमेरिका,  EAU, रूस, जर्मनी, जापान, और चीन के बाद अब भारत भी इस दिशा में इतिहास रचने को तैयार है. बता दें कि कर्नाटक में बेंगलुरु-पुणे नेशनल हाइवे पर चल्लकेरे कस्बे से सटे उल्लारथी गांव में भारत अपना पहला ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर बनाने की तैयारी कर रही है.

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इस सेंटर में अंतरिक्ष में जाने वाले व्योमनॉट्स या यू कहें अंतरिक्षयात्री जीरो ग्रेविटी में हवा में तैरते हुए ट्रेनिंग लेंगे. और तो और इस स्कीम के जरिए सरकार के 30 करोड़ रूपयों की बचत भी की जा सकती है. बता दें कि इस स्पेस सेंटर में स्पेसक्राफ्ट के क्रू और सर्विस मॉड्यूल से लेकर अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग और मिशन कंट्रोल सेंटर भी यहीं होगा. इस ट्रेनिंग सेंटर में एक साथ तीन अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग दी जा सकेगी. जबकि नासा में एक साथ 13 अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग देने की सुविधा है. आइए आपको बताते हैं कि 3 साल में तैयार होने वाला ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर आखिर कैसा होगा.

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ग्राफिक-

  • इस ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर को 473 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा.
  • स्पेसक्राफ्ट के क्रू, सर्विस मॉड्यूल से लेकर अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग और मिशन कंट्रोल भी इसी सेंटर में किया जाएगा.
  • यहां क्रू मॉड्यूल सिमुलेटर और माइक्रोग्रेविटी वातावरण देने के लिए वैक्यूम चैंबर, पैराबोलिक फ्लाइट, न्यूट्रल बायेंसी की सुविधा होगी.
  • इस सेंटर में अंतरिक्ष यात्रियों को जीरो ग्रेविटी में हवा में तैरते हुए काम करने की ट्रेनिंग दी जाएगी.

बता दें कि गगनयान के लिए चुने गए यात्रियों को रूस के रॉसकॉसमोस में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा. इसरो ने इसके खर्च को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है. लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार एक अंतरिक्ष यात्री की ट्रेनिंग विदेश में करवाने पर 25-30 करोड़ रुपए का खर्च किया जाता है जो कि सेंटर बनने के बाद अपने देश में ही हो सकेगा.

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