बायसेक्शुअल, होमोसेक्शुअल और एसेक्शुअल शब्द तो आपने ज़रुर सुने होंगे। एक लड़की जो संध्या हंसती खिल-खिलाती हुई रहती है, जिससे सेक्शुएल लाइफ पसंद नहीं है, जो किसी लड़के को देखकर एक्ट्रेक्ट नहीं होती है उससे कैसा परिवार पंसद है, ये जानना आपके लिए बेहद दिलचस्प होगा है।

Asexual Girl Sandhya

आपको बता दें, कि संध्या नाम की लड़की है, जो परिवार के पारंपिरक ढांचे में गुम हो जाए, वो ये नहीं मानती कि एक खुशहल परिवार में पित-पत्नि और बच्चों का होना ज़रुरी है। वो कहती है कि परिवार के लिए हर व्यक्ति की अपनी अलग परिभाषा हो सकती है। संध्या याद करती है। कि 23-24 साल की उम्र में मुझे लगने लगा कि मेरे साथ कुछ तो अलग है। तब मेरी हम उम्र लड़कियों के बॉयफ्रेंड बनने लगे थे, वो लड़को को डेट कर रही थी और रिलनेशनशिप में जा रही थी। लेकिन मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं हो रहा था।

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आपको बता दें, कि ऐसा नहीं है कि संध्या को लड़के बिलकुल अच्छे नहीं लगते थे, वो बताती है उस वक्त एक लड़का मुझे काफी पसंद था। मुझे उसका साथ बहुत अच्छा लगता था। साथ रहते-रहते उसकी उम्मीदें बढ़ने लगी और ये सामान्य भी था। मगर जैसे ही बात सेक्स के करीब पंहुची मैं एकदम से असहज हो गई है। मुझे लगा कि मेरा शरीर ये सब स्वीकार ही नहीं कर सकता है। जैसे मुझे सेक्स की ज़रुरत ही नहीं थी। ऐसा नहीं था कि संध्या के मन में सेक्स को लेकर कोई डर था। ऐसा भी नहीं था कि सेक्स के बिना वो अपनी जिंदगी में कोई कमी महसूस करती थी।

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संध्या बताती है, कि मैं रिश्तों में रोमैंटिक झुकाव तो रखती थी, लेकिन मुझ में किसी के लिए ज़रा सा भी यौन-आकर्षण महसूस नहीं करती थी। जिस लड़के से मुझे प्यार था। उसका हाथ पकड़कर चलना मुझे बहुत पसंद था। उसे गले लगाना, उसके साथ कुछ वक्त बिताना, ये सब मुझे अच्छा लगता था, लेकिन सेक्स के वक्त मुझे दिक्कत महसूस होने लगती थी। मेरा शरीर ही रिस्पॉन्ड करना बंद कर देता था।

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आपको बता दें, कि संध्या खुद बताती है, कि ऐसे अनुभव कई बात हुए है हर बार रिश्ते के शारीरिक नज़दिकी तक पंहुचते ही वो पीछे हट जाती है। जब उन्होंने अपने दोस्तों से ये बातें शेयर की तो उन्होंने उन्हे डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी। हालांकि, संध्या ने डॉक्टर के पास जाने से पहले खुद इस बारें में पढ़ना और समझना शुरु किया और इसके लिए उन्होंने इंटरनेट और सेक्शुअलिटी के बारें में जानकारी देने वाली अलग-अलग वेबसाइट का सहारा लिया। वो सोशल मीडिया पर एसेक्शुअलिटी से सम्बन्धित कुछ ग्रुप्स से भी जुड़ीं थी।

संध्या से जब इस बारें में पूछा गया कि वो कैसा परिवार चाहती है, तो उन्होंने इस बारें में कहा कि उन्हे सोशल मीडिया पर तो कई लोग मिले लेकिन असल जिंदगी में कोई नहीं मिला है। वो कहती है कि कई लोग एसेक्शुअल होते है लेकिन, सही जानकारी न मिलने की वजह से खुद को समझ नहीं पाते है और अंदर घुटते रहती रहती है। संध्या कहती है कि अगर एसेक्शुअल कम्युनिटी से कोई अच्छा लड़का मिलता है, तो वो ज़रुर उसके बारें में सोचेंगी। वही उनके लिए परिवार के क्या मायने है इसके बारें में संध्या कहती है कि मेरे लिए, मेरी सहेलियां और मेरी बिल्डिंग में रहने वाली लड़कियां ही मेरा परिवार है।

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