महाराष्ट्र की सरकार बने तो महीनों बीत चुके हैं. लेकिन यहां की सियासत में आए दिन बयानबाजियों के जरिए उठापटक जारी रहती है. कहने को तो महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और NCP की सरकार है. लेकिन शिवसेना और कांग्रेस एक दूसरे पर ऐसे वार-प्रतिवार करते रहते हैं कि मानो ये दोनों विरोधी पार्टियां हो. तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी इस झगड़े में तड़का लगाने का काम करती है. वैसे देखा जाए तो इस समय कांग्रेस की तरफ से महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री अशोक चव्हाण ने तो वहीं शिवसेना की तरफ से संजय राउत ने कमान संभाल रखी है. इन दोनों में आपसी बयानबाजियों का दौर लगातार जारी रहता है.

ताजा खबर की बात करें तो अब पृथ्वीराज चव्हाण के उस बयान पर बवाल खड़ा हो गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि 2014 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद भी उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी NCP ने बीजेपी को रोकने के लिए मिलकर सरकार बनाने का प्रस्ताव दिया था. इस बयान के बाद से राजनीतिक बवंडर खड़ा हो गया है. इस बयान को जहां शिवसेना ने खारिज किया है तो वहीं बीजेपी ने शिवसेना के चरित्र पर ही उंगलियां उठाई हैं. बता दें कि शिवसेना ने अशोक चव्हाण के इस बयान को खारिज करते हुए सामना में लिखा कि

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ग्राफिक ‘ऐसे प्रस्ताव की उस समय कोई अहमियत नहीं थी और 2019 चुनाव में भी कांग्रेस और NCP का विधानसभा चुनाव के बाद गठन भी इसलिए हुआ क्योंकि NCP प्रमुख शरद पवार ने बीजेपी की राजनीतिक साजिश सफल नहीं होने दी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गठबंधन के प्रस्ताव को ठुकराया नहीं. चव्हाण की बातों में कोई तर्क नहीं है. उनका यह दावा हवा हो जाना चाहिए था. शिवेसना और NCP उनके दावों को गंभीरता से नहीं लेती.’ हालांकि शिवसेना ने कांग्रेस नेता के बयान को भले ही खारिज कर दिया हो लेकिन इस पर बीजेपी ने अशोक चव्हाण के इस बयान का स्पष्टीकरण मांगा है.

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देवेंन्द्र फडणवीस ने शिवसेना की आलोचना करते हुए कहा कि ‘चव्हाण ने जो कहा, वो बहुत ही आश्चर्यजनक है. उनके इस बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. इस खुलासे से शिवसेना का असली चेहरा सामने आया है.’ अब ऐसे में सवाल उठते हैं कि अगर 2014 में भी शिवसेना ने कांग्रेस और NCP के साथ बीजेपी को रोकने की कोशिश की थी. तो इसे एक साजिश के तौर पर भी देखा जा सकता है. जिसपर से पृथ्वीराज चव्हाण ने पर्दा उठाने का काम किया है. गौरतलब है कि 2014 विधानसभा चुनाव बीजेपी, शिवसेना, कांग्रेस और NCP ने अलग-अलग लड़ा था… बीजेपी को 122, शिवसेना को 63, कांग्रेस को 42 और NCP को 41 सीटें हासिल हुई थी. जिसके बाद बीजेपी ने अकेले महाराष्ट्र की सरकार चलाने का बीड़ा उठाया और कुछ समय बाद शिवसेना भी सरकार का हिस्सा बन गई. लेकिन इस बार शिवसेना ने सीएम पद की उम्मीदवारी के लिए अपनी विचारधारा को ही ताख पर रख दिया. और सत्ता के लालच में NCP और कांग्रेस के साथ आ गई है.

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