कुछ दिन पहले देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाई गई. देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बापू को श्रंद्धांजलि अर्पित की गई. आज फिर से बापू को याद करने के पीछे एक वजह है. दरअसल भारत का इतिहास तो ये कहता है कि बापू की हत्या हुई थी. नाथूराम विनायक गोडसे ने भरी सभा में बापू पर तीन गोलियां दागी थीं लेकिन अब इस स्टोरी में नया क्लाईमेक्स आ गया है. बापू की हत्या नहीं बल्कि उन्होंने आत्महत्या की थी.

ये हम नहीं कह रहे बल्कि ये चौंकाने वाला सवाल गुजरात के 9वीं कक्षा के छात्रों से पूछा गया. सवाल ये था कि ‘गांधीजी ने आत्महत्या कैसे की?’ जिसके बाद तो प्रशासन पर तमाम सवाल उठने लगे. दरअसल ये सवाल गुजरात के गांधी नगर में एक प्राइवेट स्कूल में इंटरनल एग्जाम में पूछा गया था.

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परीक्षा में ये अटपटा सवाल पूछे जाने का मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी है. इतना ही नहीं, इसी स्कूल ने 12वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं से भी एक अजीबो-गरीब सवाल पूछा, जिसे देख अधिकारी हैरत में पड़ गए. स्टूडेंट्स से पूछा गया, ‘अपने इलाके में शराब की बिक्री बढ़ने और शराब तस्करों द्वारा पैदा की जाने वाली परेशानियों के बारे में शिकायत करते हुए जिला पुलिस प्रमुख को एक पत्र लिखें.’ जबकि गुजरात में शराब पर पूरी तरह से बैन है. ऐसे में ये सवाल ही पूरी तरह बेतुका है.

गांधी नगर के जिला शिक्षा अधिकारी भारत वधेर ने पीटीआई को बताया कि ये दोनों ही सवाल बेहद आपत्तिजनक हैं, जिनकी जांच शुरू हो चुकी है और जल्द ही इस पर कार्यवाही भी की जाएगी. इन प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधन ने प्रश्नपत्र बनाए थे, जो सुफलाम शाला विकास सांकुल के बैनर तले चलाए गए थे, और राज्य शिक्षा विभाग की इसमें कोई भूमिका नहीं थी.

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अब सावल तो ये उठता है कि इतनी बड़ी लापरवाही कोई कैसे कर सकता है. दरअसल, ज्यादातर लोग ये नहीं जानते कि गांधीजी ने बचपन में आत्महत्या करने की कोशिश की थी. क्योंकि उऩको लगता था कि बड़ों की अनुमति के बिना कुछ कर ही नहीं सकते तो ऐसे जीने का भला क्या फायदा. यही सोचकर एक दिन जंगल गए और वहां से धतूरे के बीज लेकर आए. फिर एक मंदिर में भगवान के दर्शन करने के बाद उन्होंने दो या तीन बीज तो निगल लिए लेकिन ज्यादा लेने का साहस नहीं कर पाए. इस घटना का वर्णन उन्होंने अपनी आत्मकथा में भी किया है. लेकिन यहां बच्चों से पूछे गए सवाल में गांधी जी के बचपन की बात ही नहीं की गई.

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आपको बता दें कि बापू के जीवन का अंत उनकी हत्या करने से ही हुआ था. 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली के बिड़ला भवन में नाथूराम विनायक गोडसे ने गांधीजी को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

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