हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ आज सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. गुजरात की निचली अदालत ने हार्दिक को 2015 के मेहसाणा दंगे में दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई थी. जिसे गुजरात हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था. और हार्दिक के चुनाव लड़ने पर भी रोक लग गई थी.

हार्दिक ने अपनी याचिका में गुजरात हाई कोर्ट के फ़ैसले पर रोक और सज़ा को निलंबित करने की मांग की है. उनका कहना है कि नामांकन का आखिरी दिन नज़दीक है. लिहाजा वह चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट उनकी याचिका पर जल्द सुनवाई करे.

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दरअसल, जन प्रतिनिधित्व कानून और सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था के तहत दो या दो से अधिक साल की जेल की सजा काट रहा व्यक्ति अपने उपर लगे आरोपों पर रोक न लग जाने तक चुनाव नहीं लड़ सकता. और इसी वजह से कोर्ट का ये फैसला कांग्रेस के लिए भी एक बड़ा झटका साबित हो सकता है. क्योंकि पार्टी ने हार्दिक को जामनगर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाने की योजना बनाई थी.

बता दें कि गुजरात हाई कोर्ट ने दंगा भड़काने के मामले में हार्दिक की सजा पर रोक लगाने से 29 मार्च 2019 इनकार कर दिया था. पिछले साल जुलाई में गुजरात की एक अदालत ने मेहसाणा के भाजपा विधायक के दफ्तर पर हमला करने के आरोप में हार्दिक पटेल और उनके दो अन्य साथियों को दोषी ठहराते हुए दो-दो साल की सजा सुनाई थी. इसके अलावा उन्हें 50-50 हजार रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया था.

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