इन दिनो सभी राजनीतिक पार्टिया आगामी 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर अपनी अपनी तैयारियो में व्यस्त हैं. हर एक पार्टी अपने अपने तरीके से जन्ता का दिल जीतने की कोशिशों में लगी हुई है. कहीं किसी पार्टी की रैलियां निकल रही हैं. तो कहीं कोई पार्टी चुनावी मुद्दों को लेकर बैठक में व्यस्त है. और इसी हलचल के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है. जिससे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को तगड़ा झटका लगा है.

दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने बृहस्पतिवार को अहम फैसला सुनाया है. जिसमे हाईकोर्ट ने एजेएल की याचिका खारिज करदी है. और हाईकोर्ट के फैसले के तहत एजेएल को नेश्नल हेराल्ड हाउस खाली करना ही होगा. लेकिन जिस याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. इस याचिका में आखिर था क्या.दरअसल, पिछले साल हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने दो हफ्ते में हेराल्ड हाउस खाली करने का आदेश दिया था, जिसके बाद एजेएल ने सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच में अपील की. जिसमें 21 दिसम्बर को सुनाए गए सिंगल बेंच के फैसले पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई थी.

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नैश्नल हेराल्ड, जिसको लेकर ये सारा बवाल मचा हुआ है ये क्या है. और क्यों राहुल गांधी को इसे खाली करने को कहा जा रहा है ये भी जान लीजिए.

एजेएल नेशनल हेराल्ड अखबार की मालिकाना कंपनी है. कांग्रेस ने 26 फरवरी 2011 को इसकी 90 करोड़ की देनदारी अपने जिम्मे ले ली थी. यानी कंपनी को 90 करोड़ का लोन दिया. इसके बाद पांच लाख में यंग इंडियन कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया औऱ राहुल की 38-38% के हिस्सेदार थे और बाकी का 24 % कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नाडीज के पास है. बाद में एजेएल के 10-10 रुपये के नौ करोड़ शेयर यंग इंडियन को दिए गए. बदले में यंग इंडियन को कांग्रेस का लोन चुकाना था. नौ करोड़ शेयर के साथ यंग इंडियन को कंपनी के 99% शेयर हासिल हो गए. इसके बाद कांग्रेस ने 90 करोड़ का लोन माफ कर दिया. यानी यंग इंडियन को मुफ्त में एजेएल का मालिकाना हक मिल गया.
आपको बता दें कि केंद्र सरकार का कहना था कि दस साल से इस परिसर में कोई भी प्रेस संचालित नहीं हो रहा है और इसका उपयोग व्यापारिक उदेश्य के लिए किया जा रहा है जोकि लीज कानून का उल्लंघन है.

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