अगले दो महीनों में देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसके लिए चुनाव आयोग के साथ ही प्रशासन ने भी तैयारियां शुरू कर दी है. चुनाव आयोग के साथ ही प्रशासन मतदाताओं को जागरूक करने के लिए हर तरीका अपना रही है. लेकिन मध्यप्रदेश के झाबुआ में जिला प्रशासन ने मतदाताओं को जागरूक करने का तरीका अपनाया है, वो विवादों में आ गया है.

जीहां, मध्य प्रदेश में 28 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने हैं, इसीके मद्देनजर आदिवासी बहुल जिले झाबुआ के वोटरों को जागरूक करने के लिए प्रशासन ने शराब की बोतलों का सहारा लिया. देसी शराब की बोतलों पर प्रशासन ने स्टिकर चिपकाए हैं. इन स्टिकरों पर लिखा है- ‘हंगला वोट जरूरी से, बटन दबावा नूं, वोट नाखवा नूं’ यानी ‘सबका वोट जरूरी है, बटन दबाना है, वोट डालना है’.

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शराब की बोटल पर स्टिकर

इन स्टिकर लगी बोतलों की तस्वीरें जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई, तो विवाद शुरू हो गया. व्हॉट्सएप पर शराब की बोतलों ये तस्वीरें देखकर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी. हालांकि विवाद बढ़ता देख झाबुआ के कलेक्टर ने इन स्टिकरों को हटाने के आदेश दे दिए हैं.

झाबुआ कलेक्टर आशीष सक्सेना

आपको बता दें, कि इन स्टिकरों को झाबुआ कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी आशीष सक्सेना की ओर से ही जनहित में जारी करवाया गया था. आदिवासी भाषा में लिखे हुए ये दो लाख स्टिकर शराब ठेकेदारों को दिए गये थे. जिनको शराब की बोतलों पर चस्पा करने के लिए कहा गया था.

शराब को बोटल पर स्टिकर चिपकाता कर्मचारी

दिक्कत ये है, कि इन स्टिकरों के पीछे शराब की बोलतों पर लिखी वैधानिक चेतावनी भी दब जा रही है. जब व्हॉट्सएप पर इन स्टिकरों का विरोध हुआ, तो जिला प्रशासन ने स्टिकर चिपकाने के अपने आदेश को वापस ले लिया. मध्यप्रदेश की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कान्ता राव ने भी इसकी पुष्टी की थी, कि झाबुआ कलेक्टर ने ऐसे दो लाख स्टिकर छपवाये थे और उनमें से 200 से ज्यादा स्टिकर शराब से भरी बोतलों पर चिपकाए भी गये थे. हालांकि उन्होंने ये भी बताया, कि ये स्टिकर वैध शराब वाली बोतलों पर लगाए थे.राव ने कहा, कि जैसे ही उन्हें इस बात की खबर मिली, उन्होंने तत्काल इन स्टिकरों को चिपकाने पर रोक लगा दी. अब ये स्टिकर शराब की बोतलों की बजाय किसी टूसी चीजों पर चिपकाए जाएेंगे.

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