लोकसभा चुनाव से पहले पांच राज्यों में चुनाव होने हैं और उससे पहले हम उन राज्यों की राजनीति से जुड़े वो किस्से आपके लिए लेकर आए हैं, जो आपके लिए न सिर्फ अनसुने होंगे बल्कि रोचक और जानकारी से भरपूर भी होंगे. आज बात मध्यप्रदेश के उस रसूखदार राजनेता की, जो मुख्यमंत्री बनने के लिए दिल्ली में इंतजार करते रह गया और एक सांसद प्रदेश का मुख्यमंत्री बन गया.

बात 1993 की है. अयोध्या में बाबरी विध्वंस के बाद नवंबर में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए. इन चुनावों में कांग्रेस को अप्रत्याशित जीत मिली थी. ये वो दौर था, जब प्रदेश कांग्रेस की कमान कांग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले दिग्विजय सिंह के हाथों में थी. आपको जानकारी दे दें, कि बाबरी विध्वंस के बाद एमपी में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था. इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई थी.

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File Pic

इस चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में श्यामा चरण शुक्ल, माधवराव सिंधिया और सुभाष यादव जैसे नाम शामिल थे. प्रदेश से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन सिंह ने पिछड़ा वर्ग से मुख्यमंत्री बनाने के लिए सुभाष यादव के नाम को आगे बढ़ाया, लेकिन बैठक में जब उऩके सुझाए गए नाम पर सहमति नहीं बनी तो वे अपना भाषण खत्म करके बाहर चले गए.

अर्जुन सिंह नरसिम्हा राव के साथ File

उधर माधवराव सिंधिया दिल्ली में हेलीकॉप्टर तैयार कर भोपाल से फोन आने का इंतजार कर रहे थे. उनको पूरा यकीन था, कि प्रदेश के मुख्यमंत्री वही बनने वाले हैं. लेकिन कांग्रेस ने उस वक्त एक ऐसे नेता को मुख्यमंत्री बना दिया, जो राज्य की विधानसभा का सदस्य भी नहीं था. बल्कि एक सांसद था.

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माधवराव सिंधिया (File)

घटना कुछ इस तरह हुई, माधव राव सिंधिया से कहा गया था कि जैसे ही आपको खबर दी जाएगी आप तत्काल हेलीकॉप्टर से दिल्ली से भोपाल आ जाइएगा. श्यामाचरण शुक्ल और सुभाष यादव के मुख्यमंत्री नहीं बनने पर अर्जुन सिंह अपने विधायकों का समर्थन माधवराव सिंधिया को देंगे. उस वक्त बैठक में बतौर केंद्रीय पर्यवेक्षक प्रणब मुखर्जी, सुशील कुमार शिंदे और जनार्दन पुजारी मौजूद थे. मुख्यमंत्री पद के लिए विवाद बढ़ता देख प्रणब मुखर्जी ने गुप्त मतदान करवाया था. इस मतदान में 174 में से 56 विधायकों ने श्यामाचरण के पक्ष में जबकि 100 से अधिक विधायकों ने दिग्विजय सिंह के पक्ष में मतदान किया था.

File Pic-कमलनाथ और दिग्विजय सिंह

नतीजा आते ही कमलनाथ भवन के उस कमरे की ओर दौड़े जहां टेलिफोन लगा था. उन्होंने वहां से दिल्ली किसी को फोन किया. इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने फोन पर प्रणब मुखर्जी से कहा कि जिसके पक्ष में ज्यादा मतदान किया गया है, उसे मुख्यमंत्री बना दिया जाए। इस नाटकीय घटनाक्रम में दिग्विजय सिंह को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया गया और माधवराव सिंधिया दिल्ली में बैठकर फोन आने का इंतजार ही करते रह गए.

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File Pic मनमोहन सिंह, नरसिम्हाराव और सोनिया गांधी

दिग्विजय सिंह को श्यामा चरण शुक्ल लेकर आए थे, और बैठक में हुए मतदान का जब डिब्बा खुला तो दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री बन गए. बताया जाता है कि माधवराव सिंधिया को रोकने के लिए दिग्विजय सिंह और अर्जुन सिंह ने ये नाटक रचा था. हांलाकि इसका कोई सटीक प्रमाण ​नहीं मिलता है.

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