पाथेर पंचाली, मदर इंडिया, मेरा नाम जोकर, आवारा और कागज के फूल जैसी क्लासिकल फिल्मों की ओरिजनल कॉपी अब आप दोबारा नहीं देख पाएंगे. साल 2017 में ऐसी खबरें आईं कि हजारों फिल्मों की ओरिजनल रील गायब हो गई है. अब कैग (CAG) यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है.

कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार (NFAI) में रखी करीब 31 हजार फिल्मों की ओरिजनल रील और कैन खो गई है या फिर नष्ट हो गई है. कैग ने 1 मई 2015 से 30 सितंबर 2017 के बीच एनएफएआई के रिकॉर्ड की जांच कर ये बताया है. बता दें कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एनएफएआई की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य सिनेमा की विरासत को सुरक्षित बचाकर रखना था.

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एनएफएआई के पास भारतीय सिनेमा के 106 साल के इतिहास की तमाम डीवीडी, किताबें, पोस्टर, चित्र, ऑडियो सीडी, डिस्क रिकॉर्ड और वीडियो कैसेट्स हैं. कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि किताबों का भौतिक सत्यापन किया गया था लेकिन ऑडियो सीडी, डिस्क रिकॉर्ड और वीडियो कैसेट्स की जांच नहीं की गई थी. ये पूरी रिपोर्ट एक आरटीआई कार्यकर्ता ने हासिल की है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि एनएफएआई के रजिस्टर के मुताबिक, साल 2016-17 में 1,32,000  फिल्मों के रील या कैन थे जबकि बाद में ठेकेदारों के बिलों और भुगतान से पता चला कि केवल 1,00,377  रील के डिब्बे बचे हैं. जिससे पता चलता है कि 31,263 रील या कैन खो गए हैं या तो नष्ट हो गए हैं.

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इस जानकारी के सामने आने के बाद ये बात बिल्कुल साफ है कि एनएफएआई के ढीले रवैये की वजह से अब दर्शकों को वो फिल्में कभी नहीं देखने को मिल सकेंगी, जो पूरी दुनिया में अपना नाम कमा चुकी हैं.

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