किसी वक्त नवाजुद्दीन सिद्दीकी अपनी कुर्सी पर अक्सर खड़े हो जाया करते थे ताकि उन्हें तीजन बाई की परफॉर्मेंस की एक झलक दिख जाए. नवाज़ुद्दीन, तीजन बाई की गायिकी के दीवाने थे. आज नवाज इस बात को लेकर काफी उत्साहित हैं कि उनकी पत्नी आलिया सिद्दीकी और मंजू गढ़वाल वायएस एंटरटेनमेंट के बैनर तले मशहूर लोक गायिका तीजन बाई की जिंदगी पर एक फिल्म बनाने वाले हैं.

आलिया सिद्धिकी से जब तीजन बाई के किरदार को निभाने वाले के बारे में पूछा गया तो वे बोलीं- हम चाहते हैं रानी मुखर्जी, विद्या बालन या प्रियंका चोपड़ा इनमे से एक हो.

प्रेरणादायक रहा है तीजनबाई का जीवन:

तीजन बाई की बायोपिक का आइडिया ऐसे समय में सामने आया है जब उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है. जिसमें से एक है 2018 में उन्हें दिया गया द फुकुओका प्राइज. इस फिल्म की मेकिंग में आलिया सिद्दीकी और मंजू गढ़वाल की मदद कर रहे नवाज़ुद्दीन कहते हैं- तीजन बाई अपने आप में एक किवदंती हैं. मुझे आलिया पर‌ पूरा यकीन है कि वे इस फिल्म को महज फिल्म फेस्टिवल के लिए नहीं, बल्कि आज के आम‌ दर्शकों को ध्यान में रखकर इसे बेहद प्रासंगिकता के साथ बनाएंगी.

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तीजन बाई को लोक गायन की मशहूर कला पंडवानी में महारत हासिल है. पंडवानी छत्तीसगढ़ में सुनाई जाने वाली महाभारत से जुड़े किस्सों से संबंधित गायन विधा है. तीजन बाई की इसी कला ने आलिया सिद्दीकी को बेहद प्रभावित किया. उन्हें लगा कि एक बायोपिक उनकी जिंदगी के साथ न्याय कर पाएगी. इसलिए स्क्रिप्ट लिखने का जिम्मा भी आलिया ने खुद ही उठाया. आलिया चाहती हैं कि फिल्म के तमाम गाने एक ऐसा कद्दावर शख़्स लिखे जिसे कलम का जादूगर माना जाता है. आलिया की दिली ख़्वाहिश है कि गुलज़ार साहब तीजन बाई पर बन रही फ़िल्म के गाने लिखकर उनकी ज़िंदगी को अपने लिखे शब्दों से हमेशा के लिए अमर कर दें.

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वायएस एंटरटेनमेंट के बैनर तले आलिया सिद्दीकी और मंजू गढ़वाल प्रोड्यूस कर रही हैं. मंजू गढ़वाल कहती हैं- आज भी वे अपनी जादुई और प्रभावशाली आवाज से दुनिया भर के श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर रही हैं. और अपनी गायिकी को आज की पीढ़ी तक पहुंचा रही हैं.

ऐसी है तीजन बाई की लाइफ स्टोरी:

छत्तीसगढ़ के गनियारी गांव में 1956 में जन्मीं तीजन बाई के पिता का नाम चुनुक लाल पारधी और मां का नाम सुखवती था. छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जाति पारधी समाज से ताल्लुक रखने वाली तीजन बाई को 1988 में पद्मश्री, 1995 में श्री संगीत कला अकादमी पुरस्कार, 2003 में डॉक्टरेट की डिग्री, 2003 में पद्म भूषण, 2016 में एमएस सुब्बालक्ष्मी शताब्दी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.

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तीजन बाई की शादी 12 साल की बेहद नाज़ुक उम्र में कर दी गई थी. उन्हें अपने पारधी समाज से निष्काषित भी कर दिया गया था. उनका कसूर बस इतना था कि वे एक महिला होकर पंडवानी गायिकी की विधा में बेहद रुचि रखती थीं. इस तरह से बचपन से ही उनका संघर्ष शुरू हो गया था. वे एक झोपड़ी बनाकर रहती थीं. आलिया सिद्दीकी कहती हैं- उन्होंने कभी भी गायिकी का दामन नहीं छोड़ा और इसी गायिकी के चलते उन्हें लोकप्रियता मिली. तीजन बाई की जिंदगी के कई पहलू हैं जिसके बारे में लिखा जा सकता है. मुझे शिद्दत से लगा कि उनकी जिंदगी पर एक फिल्म बनाई जानी चाहिए.

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