खामोश रहना या कम बोलना ये खुद में दो बड़े सवाल हैं। खामोशी के अपने ही राज़ होते हैं। हमारे पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को ही ले लीजिए, वो बेहद कम बोलते थे, इसलिए विपक्ष ने उनका नाम ही मौन मोहन सिंह रख दिया था। कम बोलने की कई परिभाषाएं हैं। कहीं इसकी गिनती ‘अच्छे संस्कार’ में होती है, तो कही इसे ‘डिप्रेशन’ माना जाता है, तो कोई इसे बात छिपाने की कला या आदत बताते हैं। हालांकि सबकी खामोशी की अपनी वजह और अपना राज़ होता है, जो वे खुद ही बेहतर बता सकते हैं। लेकिन, बात किसी एक की हो या कुछ लोगों की, तो हम इसे उनकी आदत कह सकते हैं, लेकिन ये बात एक देश की पूरी अवाम की हैं।

A wise man once said nothing.

यूरोप में एक देश ऐसा है, जिसे कम बोलने वाला देश माना गया है। जीहां , नॉर्थन यूरोप के लातविया नाम के देश में कम बोलने वाले लोग रहतें हैं। इसे वो अपने कल्चर का हिस्सा मानतें हैं। यहाँ के लोग एक दूसरे से मिलना छोड़िये, Hi-hello तक नहीं करते। लोगों को एक-दूसरे का सामना ना करना पड़े इसलिए वो उनके पड़ोसियों के पहले घर से निकल जाने का इंतज़ार करतें हैं। यहां के लोगों को कम बोलना और अकेले रहने में ही मज़ा आता है। उन्हें खुद से बातें करना बहुत पसंद है।

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Homes in Latvia

लातविया घने जंगलों के बीचएक कम आबादी वाला देश है। यहाँ के लोग नेचर से तो प्यार करतें ही हैं, साथ ही उन्हें किसी से मिलना न पड़े, इसलिए वे अपने घर दूर-दराज घने जंगलों में बनातें हैं। कुछ ज़रूरत की चीज़ों के साथ ये लकड़ी के घर में आराम से रह लेते हैं। तीज त्योहार पर लोगों की एक दूसरे के साथ मिलने की मजबूरी होती है, लेकिन उसे भी इन्होंने खत्म कर दिया है। ये लोग अपने देश के अक बड़े उत्सव लातवियन सांग फेस्टिवल को 5 साल में एक बार ही मनाते हैं।

Latvia sonf festival
2017 में हुए लंदन बुक फेयर में लातवियन लिटरेचर की ओर से आई ‘कॉमिक बुक’ बहुत फेमस हुई थी। लातवियन लिटरेचर संस्था ‘आई एम इंट्रोवर्ट’ मुहीम से जुडी हुई हैं, जिसकी शुरुआत लातविना की एक लेखिका “अनेते कोनस्ते” ने की। उनके मुताबिक कम बोलना या ज्यादा शांत रहना अच्छी बात नहीं है।
London Book Fair-Hunt Down the Introverts
BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां के लोग एक दूसरे का सामना करने से कतराते हैं, इसीलिए खुली सड़क की बजाए गलियों से रास्ता तय करना पसंद करते हैं। लेकिन आपको बता दें, कि खामोश रहने वाले इस देश के लोग बहुत टैलेंटेड हैं। वो हमेशा कुछ क्रिएटिव करने का सोचते रहते हैं। लातविया के लोगों पर हुए एक रिसर्च में पाया गया, कि कम बोलने वाला व्यक्ति किसी क्रिएटिव काम से ज़रूर जुड़ा हुआ जैसे संगीत से, लिखने के काम से आदि। यहां की सरकार ने शिक्षा और Socioeconomic Growth के लिए जितनी भी पॉलिसीज़ बनाई हैं, उसमे क्रिएटिविटी पर ज्यादा ध्यान दिया है।
Market in Latvia
यहां की नई पीढ़ी की सोच कुछ अलग है, वो इस कल्चर को ज्यादा पसंद नहीं करती है। वो लोगों से मिलने में, बात करने में, अपनों के साथ समय बिताने पर यक़ीन करती है। यूरोप की बड़ी आबादी मॉडर्न अपार्टमेंट्स में रहती है। लातविया में रुसी मूल के लोग बहुत हैं।
People of Latvia
बहरहाल, आप अगर कभी लातविया जाएँ तो इस खामोश देश से घबराएं नहीं। लातविया एक बहुत ही सुंदर देश है। यहां घूमने के लिए बहुत अच्छी जगहें हैं, जैसे- लातविया की राजधानी रिगा, गौज नैशनल पार्क, जुर्मला, कल्डिग आदि। यहाँ के लोगों को शांत रहना ज़रूर पसंद हो, लेकिन वो दोस्ती भी करते हैं और किसी को मुश्किल में देख उसकी मदद करने को हमेशा तैयार रहते हैं ।
Riga capital of Latvia

लातविया में बाहर के लोग बहुत हैं, जिससे लातवियनों की आबादी कम हो गई है। नतीजतन मूल लातवियनों को आने वाले समय में अकेले रहने की आदत को छोड़ना पड़ सकता है। आने वाले समय में अकेले रहना ख़तरों से भरा हुआ है। कम  होते लातवियानों को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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