नई दिल्ली। दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिटी भारत ही नहीं दुनिया का सबसे ऊंची आदमकद प्रतिमा है। इसकी कुल ऊंचाई 182 मीटर है। इसे बनाने में हजारों मजदूर व सैकड़ों इंजीनियर महीनों तक जुटे रहे। इसके साथ-साथ अमरीका, चीन से लेकर भारत के शिल्पकारों ने भी भारी मेहनत की।

सरदार का चेहरा कैसा हो और भावभंगिमा कैसी हो इसे तय करने में काफी समय लग गया। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि आने वाले समय में यह प्रतिमा कभी दुनिया के अजूबे में गिनी जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब दुनिया में सबसे ऊंची प्रतिमाओं का इतिहास खंगाला तो चीन में बुद्ध की प्रतिमा सबसे ऊंची 128 मीटर थी, उसके बाद अमरीका का स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी (90 मीटर)।

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ऐसे में भारत में वह भी नदी के पट में 182 मीटर लंबी प्रतिमा को खड़ा करने का सपना देखना और उसे साकार करना एक बड़ी चुनौती वाला काम है। शिल्पकार पद्मश्री राम सुतार और उनके पुत्र अनिल सुतार अब अपनी कला को दुनिया के सामने लाने को बेताब हैं। उन्होंने बताया कि जब मोदी को इसका खयाल आया तो अमेरिकन आर्किटेक्चर माइकल ग्रेस और टनल एसोसिएट्स कंपनी को साथ लेकर इस पर शोध किया गया।

इस काम के लिए पीएम मोदी ने जिम्मा सौंपा सरदार सरोवर नर्मदा निगम के अध्यक्ष और गुजरात के हाइवे व कैनालमैन एसएस राठौड़ को। लगातार 44 माह के मेहनत के बाद यह प्रतिमा बनकर तैयार है। इसके निर्माण में 5 साल का वक्त लगा।

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पीएम मोदी इस प्रतिमा का अनावरन 31 अक्टूबर को करने वाले हैं। इस मौके पर देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की निमंत्रण दिया गया है।

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