दुनिया के सबसे ऊंचे शिवधाम कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर इन दिनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी गए हुए हैं। यात्रा के दौरान उन्होंने ट्वीट किया है कि कैलाश आने का सौभाग्य उसे ही मिलता है, जिसे कैलाश बुलाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि कैलाश जितना शांत, सुरम्य और सुंदर है, वो उतना ही रहस्यों से भरा भी है। कैलाश के रहस्यों को अब तक कोई सुलझा नहीं पाया है।

…कहते हैं कि गर्मी के दिनों में जब मानसरोवर की बर्फ पिघलती है तो यहां एक तरह की आवाज लगातार सुनाई देती है। लोगों की माने तो ये आवाज मृदंग की ध्वनि जैसी होती है। इस स्थान की गिनती देवी के 51 शक्तिपीठों में भी होती है। माना जाता है कि देवी सती का दांया हाथ इसी स्थान पर गिरा था, जिससे यह झील तैयार हुई। इसलिए यहां एक पाषाण शिला को उनका रूप मानकर पूजा जाता है।

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मान्यता है कि मानसरोवर झील और राक्षस झील, ये दोनों झीलें सौर और चंद्र बल को दर्शाती हैं, जिनका संबंध सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा से है। जब आप इन्हें दक्षिण की तरफ से देखते हैं तो वहां एक स्वास्तिक चिन्ह बना हुआ दिखता है। इसी जगह पर प्रकाश और ध्वनि तरंगों का समागम होता है, जो ‘ॐ’ जैसा सुनाई देता है।

मानसरोवर झील लगभग 320 किलोमीटर के इलाके में फैली है। इस झील के आस-पास सुबह ढाई बजे से लेकर पौने चार बजे के बीच कई तरह की अलौकिक क्रियाएं होती हैं, जिन्हें आप केवल महसूस कर सकते हैं, इसे देखा नहीं जा सकता।

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कहा तो ये भी जाता है कि इस सरोवर का जल आंतरिक स्रोतों के ज़रिए गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी में जाता हैं। पुराणों में इस झील का जिक्र ‘क्षीर सागर’ के नाम से होता है। क्षीर सागर कैलाश से 40 किमी की दूरी पर है। धार्मिक आस्था है कि विष्णु और माता लक्ष्मी इसी में शेष शैय्या पर विराजते हैं।

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