जब से लैंडर विक्रम ने चांद पर हार्ड लैंडिग की है तब से ही  मिशन चन्द्रयान 2 को पूरी तरह से सफल बनाने के लिए इसरो और नासा के वैज्ञानिक लगातार जीजान से लगे है. और साथ ही इस मिशन से जुड़ी एक के बाद एक देश को नई नई जानकारीयां भी दे रहे हैं. तो वहीं ठीक एक महीने बाद इसरो ने एक ऐसी खुशखरी दी है जिसने देशवासियों के चेहरे पर फिर से मुस्कान ला दी है.

जी हां भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र यानी कि ISRO को एक बड़ी कामयाबी हाथ लग गई है. और अब चांद की सतह पर कुछ ऐसा होने जा रहा है जो मिशन चंद्रयान-2 को फिर से शुरू कर देगा. दरअसल चांद की सतह पर सूरज की रोशनी आना शुरू हो गई है. खास बात तो ये है कि इससे ठीक पहले इसरो ने ही अपने ऑर्बिटर से चांद की ऐसी तस्वीरें भेंजी हैं जो सकारात्मक संकेत दे रही हैं.

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बता दे कि इसरो  ने चंद्रयान-2  के ऑर्बिटर से चांद की सतह की खींची गई तस्वीर जारी की गई है. हाई रिजॉल्‍यूशन कैमरे की इस तस्वीर पर चंद्रमा की सतह बेहद साफ नजर आ रही है. लेकिन मिशन चंद्रयान-2 को लेकर जो सबसे अच्छी खबर सामने आई है वो ये कि चांद एक बार फिर रोशन होने जा रहा है.  यहां पर आ रही सूरज की रोशनी ना सिर्फ प्रकाश ला रही है बल्कि लैंडर विक्रम से संपर्क की उम्मीदों को पंख भी लगा रही है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक लैंडर विक्रम के अंदर लगे सोलर पैनल का संपर्क जैसे ही सूरज की रोशनी से होगा वो चार्ज होना शुरू हो जाएगा. लैंडर विक्रम के चार्ज होते ही इसके तमाम फंक्शन काम करना शुरू कर सकते हैं.

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आपको बता दें कि लैंडर विक्रम से संपर्क होने के साथ ही जो सबसे अच्छी बात सामने आई है वो ये कि रोवर प्रज्ञान अब भी लैंडर विक्रम में ही मौजूद है. ऐसे में विक्रम के चार्ज होते ही रोवर प्रज्ञान के एक्टिव होने की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी. जैसे ही प्रक्रिया काम करना शुरू करेगी तो उम्मीद की जारी है कि बचा हुआ इस मिशन का हिस्सा सफल हो जाएगा.

बता दें कि  22 जुलाई 2019 को लॉन्च किये गये चंद्रयान-2 मिशन के तहत भारत को चांद की दक्षिणी सतह पर लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग करानी थी. हालांकि, अंतिम क्षणों में लैंडर की रफ्तार नियंत्रित न हो पाने के कारण वो रास्ता भटक गया और चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग की जगह उसकी हार्ड लैडिंग हुई. वो भी अपने निर्धारित स्थान से करीब 600 मीटर दूर. इसके बाद लैंडर से न तो संपर्क स्थापित किया जा सका और न ही उसने वहां कुछ काम किया. हालांकि, चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर अब भी अच्छे से काम कर रहा है और चांद की कक्षा में परिक्रमा करते हुए उसकी हाई रिजोल्यूशन तस्वीरें अपने कैमरे में कैद कर इसरो को भेज रहा है. और ये 7.5 साल तक काम करता रहेगा.

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