उत्तर पूर्व भारत में छठ के महापर्व की धूम देखी जा सकती है। इसमें पहला अर्घ्य सूर्य भगवान को दिया जाता है। ये अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जाता है। इस दौरान जल में दूध डालकर व्रती सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अर्घ्य भगवान सूर्य की पत्नी प्रत्यूषा को दिया जाता है। छठ पूजा के दौरान सूर्य की उपासना करते हुए उन्हें अर्घ्य देने का विधान बताया गया है। पर क्या आप जानते हैं सूर्य को किस समय अर्घ्य देने का आखिर क्या मतलब होता है। अगर नहीं तो आइए जानते हैं।

सूर्य को किस समय अर्घ्य देने का होता है क्या मतलब-
-ज्योतिषियों की मानें तो सूर्य को सुबह अर्घ्य देने से व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक रहता है।
-वहीं दोपहर को सूर्य को अर्घ्य देने से समाज में व्यक्ति के पद, मान-सम्मान में बढ़ोत्तरी होती है।
-वहीं ढलते सूर्य को शाम को अर्घ्य देने से जीवन में किसी चीज की कमी नहीं रहती है।

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-छठ में सूर्यास्त और सूर्योदय का समय
02 नवंबर: दिन शनिवार- तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य। सूर्योदय: सुबह 06:33 बजे, सूर्यास्त: शाम 05:35 बजे।

03 नवंबर: दिन रविवार- चौथा दिन: ऊषा अर्घ्य, पारण का दिन। सूर्योदय: सुबह 06:34 बजे, सूर्यास्त: शाम 05:35 बजे।

अर्घ्य देने की विधि-
सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए तांबे के पात्र का प्रयोग करें। इसमें दूध और गंगा जल मिश्रित करके पूजा के पश्चात सूर्य देव को अर्घ्य दें।

सूर्य को अर्घ्य देने का मंत्र-
सूर्य को अर्घ्य देते समय ओम सूर्याय नमः या फिर ॐ घृणि सूर्याय नम:, ओम घृणि सूर्य: आदित्य:, ओम ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा मंत्र का जाप करें।

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