भले ही गोरखनाथ मंदिर के प्रसिद्ध महंत योगी आदित्यनाथ इन दिनों यूपी के मुख्यमंत्री हो. लेकिन उनके पुराने मामले अब भी उनका पीछा नहीं छोड़ रहे हैं. बता दें कि इन दिनों पुराने मामलों में से एक मामला ऐसा सामने आया है जिसने सीएम योगी के आगे मुसीबत पैदा कर दी है. जी हाँ ये खबर सुनकर आप चौक गए होंगे लेकिन चौकिये मत ये खबर बिलकुल सत्य है.

दरअसल जिला सत्र न्यायालय ने 19 साल पुराने हत्याकांड के केस की सुनवाई करते हुए योगी आदित्यनाथ को बड़ा झटका दे दिया है. जिसमें कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए सीएम योगी से एक हफ्ते के अन्दर जवाब देने के लिए कहा है. अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कौन सा केस है जिसने सीएम योगी की कोर्ट ने एक साथ खटिया खड़ी कर दी है.

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दरअसल ये केस है पंचरुखिया कांड वाला. जिसमें तालाब पर बने कब्रिस्तान और श्मसान की जमीन को लेकर दो समुदायों में विवाद हो गया था. विवाद की सुलह करने करने के लिए सपा नेता तलत अजीज ने 10 फरवरी, 1999 को महाराजगंज में एक बैठक बुलाई थी, जहां गोरखपुर के तत्कालीन सांसद, भगवाधारी योगी आदित्यनाथ पहुंचे. इस सिलसिले में योगी जी ने भी अपना पक्ष रखा. लेकिन कोई बात ऐसी सामने आ गई जिसने आ में घी डाल दिया.

योगी आदित्यनाथ

फिर क्या था जिसने हिंसक रूप धारण करके आपस में टकराव पैदा कर दिया. टकराव भी ऐसा हुआ जिसमें सपा नेता तलत अजीज की सुरक्षा में तैनात पुलिस के हेड कांस्टेबल सत्य प्रकाश के गोली लग गयी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई. इसके बाद अजीज ने कोतवाली महाराजगंज में योगी और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करा दी. मामले में कोतवाली महाराजगंज के तत्कालीन एसएचओ बीके श्रीवास्तव ने योगी और 21 अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307, 153A  और अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज ली.

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बाद में तत्कालीन बीजेपी की सरकार ने सीबीसीआईडी को जांच सौंप दी। सीबीसीआईडी ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट दी। लेकिन ये साफ नहीं हो पाया कि गोली किस तरफ से चलाई गई। और अब इस मामले की सुनवाई आने वाली 27 तारीख को होगी. बता दें कि कोर्ट सबूतों को परखेगी और इस सिलसिले में अपना फैसला सुनाएगी.

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