जम्मू कश्मीर में पहली बार ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) के चुनाव 24 अक्टूबर को हो रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने राज्य के मौजूदा हालात का हवाला देते हुए कहा कि वे चुनावों में भाग लेना चाहते थे लेकि केंद्र सरकार ने भारीय जनता पार्टी को छोड़ अन्य पार्टियों के नेताओं के लिए ऐसे हालात बना दिए हैं कि वे न तो अपने लोगों के बीच जा सकते हैं और न ही पार्टी के हित में प्रचार-प्रसार कर सकते हैं।

मीर ने कहा कि उन्हें यह बात समझ नहीं आ रही कि ऐसे हालात में आखिरकार केंद्र को बीडीसी चुनावों की इतनी जल्दबाजी क्यों थी। ये चुनाव भारतीय संविधान के 73वें संशोधन के अनुसार भी नहीं हो रहे हैं। जबकि कांग्रेस हमेशा पंचायतों को मजबूत करने के पक्षधर रही है।

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मीर ने कहा कि उन्होंने अपने तौर पर कश्मीर घाटी में हालात का जायजा लिया। इंटरनेट सेवा बंद है, दुकानें नहीं खुल रही हैं, पिछले चार दिनों से बच्चे स्कूल नहीं जा पाए हैं। यह साबित करता है कि कश्मीर में हालात बहुत खराब हैं। इन सबके बावजूद कांग्रेस ने चुनाव में भाग लेने का फैसला किया, लेकिन कांग्रेस के कई नेता नजरबंद हैं और कइयों पर पाबंदियां लगाई गई हैं। सरकार की तरफ से सहयोग नहीं मिल रहा है।

बता दें की इससे पहले जम्मू-कश्मीर की नेशनल कांफ्रेस (एनसी) पार्टी ने भी बीडीसी के चुनावों का बहिष्कार करने की घोषणा की थी। नजरबंदी में दिन गुजार रहे पूर्व मुख्यमंत्री और एनसी नेता फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला से मिलने के बाद पार्टी नेता इसका ऐलान कर चुके हैं।

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