नई दिल्ली। समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी की पूजा का दिन आ गया है। दिवाली से पहले हिंदू धर्म में धनतेरस भी मनाया जाता है। इस दिन सौभाग्य और सुख की वृद्धि के लिए मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है। वैसे हर पूजा के कुछ नियम होते हैं और धनतेरस के दिन भी कई बातों और सावधानियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

धनतेरस के दिन एक ही भगवान की मूर्ति साथ-साथ ना रखें। लक्ष्मी मां की मूर्ति हमेशा भगवान गणेश (बाएं) और मां लक्ष्मी सरस्वती (दाएं) के बीच में होनी चाहिए।

धनतेरस और दिवाली की पूजा में यह बात ध्यान में रखें कि मूर्तियां बैठी हुई मुद्रा में हों और कमरे के दरवाजे की तरफ उनका मुख ना हो। मूर्तियों को उत्तर-पूर्वी दिशा में रखना सबसे शुभ है।

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धनतेरस के दिन स्नान करने और पूजा के बाद ही भोजन ग्रहण करें। वास्तु के अनुसार, धनतेरस की पूजा ईशान कोने में होनी चाहिए। यह कोना घर के उत्तर-पूर्व में पड़ता है। मां लक्ष्मी के पूजा कक्ष में काले या गहरे रंगों का पेन्ट नहीं कराना चाहिए।

धनतेरस के दिन आपके घर में कोई भी पुराना या बेकार सामान है तो सारी बेकार वस्तुएं या इस्तेमाल में ना हो रहीं चीजों को फेंक दें।

घर के मुख्य द्वार या मुख्य कक्ष के सामने तो बिल्कुल भी बेकार वस्तुएं ना रखें। ध्यान रखें कि घर के किसी कोने में इस दिन गंदगी ना रहे।

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अगर आप धनतेरस पर सिर्फ कुबेर की पूजा करने वाले हैं तो ये गलती ना करें। आज धन्वन्तरी देवता की उपासना भी जरूरी है अन्‍यथा पूरे साल बीमार रहेंगे। धनतेरस के दिन शीशे के बर्तन ना खरीदें। शीशे का संबंध राहु ग्रह से माना गया है। दिवाली के दिन धनतेरस में खरीदी गई लक्ष्‍मी गणेश की मूर्ति की ही पूजा होती है। इसलिए मूर्ती आज ही खरीद लें।

धनतेरस के दिन शाम के समय सोएं नहीं, ऐसा करने से घर में दरिद्रता आती है। धनतेरस के दिन संभव हो सके तो रात्रि जागरण करें। एक दीये को जलाए रखें।

धनतेरस के दिन घर में बिल्कुल कलह ना करें। घर की स्त्रियों का सम्मान करें। धनतेरस के दिन किसी को भी उधार देने से बचें। इस दिन अपने घर से लक्ष्मी का प्रवाह बाहर ना होने दें।

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भूलकर भी धनतेरस के दिन लोहा ना खरीदें। घर में लक्ष्‍मी जी की जगह दरिद्रता का वास हो जाएगा। मां लक्ष्मी के मंदिर की सजावट नकली फूलों से न करें। आम के पत्तों और असली फूलों से मां लक्ष्मी को प्रसन्न करें।

सोने, चांदी या मिट्टी की बनी हुई मां लक्ष्मी की मूर्ति की पूजा करें। नकली मूर्तियों की पूजा ना करें। स्वास्तिक और ऊं जैसे शुभ प्रतीकों को कुमकुम, हल्दी या किसी शुभ चीज से बनाएं।

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