महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद सरकार बनाने को लेकर तमाम सियासी कवायदों पर फिलहाल विराम लग गया है। लेकिन इसका मतलब कतई ये नहीं कि अब वहां 6 महीने तक कोई सरकार नहीं बन सकती या फिर सरकार बनाने के लिए फिर से चुनाव कराया जाना जरूरी है। हकीकत ये है कि अभी भी राज्य में सरकार बन सकती है। आइए, हम आपको बताते हैं कि वो रास्ता कौन सा है जिस पर चलकर राष्ट्रपति शासन से मुक्ति पाई जा सकती है।

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग चुका है, तो ऐसे में राजनीतिक दलों को राज्यपाल को विश्वास दिलाना होगा कि उनके पास बहुमत का आंकड़ा है। इसके बाद भी राज्यपाल के ऊपर यह निर्भर करेगा कि वह सरकार गठन के लिए राज्य से राष्ट्रपति शासन को हटाकर सरकार बनाने के लिए अमंत्रित करते हैं या नहीं।

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राष्ट्रपति शासन लगने के बाद अब अगर कांग्रेस, बीजेपी, एनसीपी और शिवसेना में से कोई भी पार्टी राज्यपाल के पास सरकार बनाने के लिए जाती है और गवर्नर को विश्वास दिलाने में पार्टी कामयाब रहती है कि उनके पास बहुमत का आंकड़ा है, ऐसी स्थिति में राज्यपाल राष्ट्रपति शासन को खत्म करने की सिफारिश कर सकते हैं।

दरअसल, यह राज्यपाल पर निर्भर करेगा कि सरकार बनाने का दावा करने वाली पार्टी से समर्थन पत्र मांगे या फिर बहुमत का आकंड़ा देखने के लिए विधायकों की परेड अपने सामने करवाए। इसमें यदि राजनीतिक दल राज्यपाल को विश्वास दिलाने में कामयाब रहते हैं तो ऐसी स्थिति में राज्यपाल केंद्र को लिखकर देंगे कि राज्य में एक स्थाई सरकार बनाने का रास्ता निकल आया है, लिहाजा राज्य से राष्ट्रपति शासन को खत्म किया जाए, ताकि सरकार का गठन हो सके।

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राष्ट्रपति शासन लगने के बाद अब अगर शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी एक मत होते हैं और तीनों पार्टियां मिलकर सरकार बनाना चाहती हैं तो ऐसे में उन्हें राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को स्थाई सरकार देने का विश्वास दिलाना होगा। इसके बाद ही राज्यपाल राष्ट्रपति शासन को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे 24 अक्टूबर को आए तो बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट बहुमत था लेकिन मुख्यमंत्री पद और सरकार में 50-50 फॉर्मूले पर शिवसेना के अड़ जाने के चलते सरकार का गठन नहीं हो सका। महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए राज्यपाल कोश्यारी के निमंत्रण देने के बावजूद बीजेपी ने अपने कदम पीछे खींच लिए।

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वहीं, शिवसेना तय समय सीमा में 145 विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को नहीं दे पाई। इसके चलते गवर्नर ने महाराष्ट्र की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी एनसीपी को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया है लेकिन समय से पहले ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश कर दी। राज्यपाल ने कहा कि महाराष्ट्र में कोई भी राजनीतिक पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है।

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