2014 के चुनावी नतीजों ने न सिर्फ देश बल्कि राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया था.सारे राजनीतिक अनुमानों को धराशाही करते हुए बीजेपी ने बंपर बहुमत हासिल किया था. इस नतीजों से विपक्ष चारों खाने चित हो गया था.बीएसपी जैसे क्षेत्रीय दलों के सूपड़ा साफ होने के बाद उनके सामने तो पहचान का संकट ही खड़ा हो गया था.ऐसे अप्रत्याशित नतीजों के बाद विपक्षी दलों न सिर्फ इन नतीजों पर बल्कि चुनाव आयोग के साथ ही ईवीएम पर भी सवाल खड़े कर दिए थे.ईवीएम पर विपक्षियों का शक..इतना गहरा गया कि वे इसे कोर्ट तक ले गए.लेकिन हर मोर्चे पर विपक्ष को मुंह की ही खानी पड़ी. वे कहीं साबित नहीं कर पाए कि ईवीएम में गड़बड़ी कर बीजेपी ने चुनाव जीता था.

हालांकि 2019 में भी इसी चमत्कार को दोहराते हुए बीजेपी ने 2014 से ज्यादा सीटें जीतकर सबको फिर हैरान दिया. बीजेपी ने दावा किया कि मोदी लहर सुनामी में तब्दील हो चुकी है. लेकिन अब 6 साल बाद एक बार फिर 2014 के चुनाव परिणाम सवालों के घेरे में आ गए हैं. और इसपर सवाल किसी राजनीतिक दल ने नहीं बल्कि एक संस्था ने खड़े किए हैं. और वो संस्था है ADR, ये संस्था भारत में चुनाव सुधार और चुनाव पर निगरानी रखने का काम करती है. इसने दावा किया है कि 2014 के चुनाव में धांधली की गई थी. और इसलिए इसकी जांच होनी चाहिए. संस्था मामवे को लेकर कोर्ट पहुंच गई है. ADR ने सुप्रीम कोर्ट में बाकायदा एक याचिका दायर की है और उस याचिका में मुख्यतौर पर दो मांग की है.

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पहली- चुनाव आयोग वो सटीक डाटा उपलब्ध कराए कि 2014 लोकसभा चुनाव में कितने वोट पड़े..और
दूसरी- ये कि 2019 लोकसभा चुनाव में हुई धांधली को लेकर भी जांच की जाए क्योंकि उपलब्ध कराए गए डाटा में धांधली हुई है. ये याचिका जिन मांगों के आघार पर दायर की गई है, उसमें चुनाव आयोग को ही सवालों के कठघरे में खड़ा किया गया है.

ADR ने बताया कि 2014 के घोषित नतीजों के बाद चुनाव आयोग की वेबसाइट और उसके एप में वोटिंग डेटा में काफी अंतर है. बदलाव कमियों को छुपाने के लिए किया गया है, जिसके लिए चुनाव आयोग की तरफ से कोई सफाई नहीं दी गई है. साथ ही ADR ने ये भी कहा कि काउंटिंग के दौरान वोटों की संख्या और ईवीएम में पड़े वोटों की कुल संख्या में भी अंतर है. ADR ने ये भी बताया कि  28 मई 2019 और 30 जून 2019 को वेबसाइट पर उपलब्ध डाटा में भी काफी अंतर है. ये अंतर 347 सीटों पर पड़े कुल वोटों और EVM में पड़े कुल वोटों में बताया गया है. ADR ने ये भी बताया कि 6 सीटों पर तो जीते प्रत्याशियों के वोटों की संख्या, जीते गए वोटों की संख्या से भी ज्यादा है. ADR ने ब्राजील, पेरू, फ्रांस, यूके से कंपेयर करते हुए भारत की चुनाव व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं. उनका दावा है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में 370 लोकसभा सीटों पर मतों की संख्या भारी गड़बड़ी की गई है. जिस पर चुनाव
आयोग ने चुप्पी साधी है और किसी भी तरह का जवाब देने से इनकार किया है.

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सवालों में चुनाव आयोग है. इसलिए उसके जवाब का इंतजार रहेगा. कि वो इस धांधली पर क्या सफाई देता है लेकिन मामला कोर्ट पहुंच चुका है..इसलिए इसपर सबकी निहगाह होगी कि क्या 2014 के चुनाव में वाकई धांधली की गई थी या फिर ये चुनाव आयोग की लापरवाही या फिर और कुछ है. वैसे ईवीएम पर उठने वाली उंगली अब सीधे चुनाव आयोग पर पहुंच गई है. मामला गंभीर है इसलिए चुनाव आयोग जल्द इस पर अपनी सफाई दे देनी चाहिए, वरना दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की विश्व में जो साख है, वो धुमिल हो जाएगी.

 

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