अमेरीकी राष्ट्रपति चुनावों के दौरान फेसबुक द्वारा यूजर्स के डेटा को बेचे जाने और जानकारी का गलत इस्तेमाल किए जाने के लगे आरोप और फेसबुक पर बढ़ते फेक न्यूज़ के कारण देश में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले फेसबुक अपने प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन में और ज्यादा पारदर्शिता लाने के लिए  अगले महीने भारत में ट्रांसपेरेंसी टूल लॉन्च करने जा रहा है. अब फेसबुक पर चुनावी विज्ञापन दिखाने के लिए विज्ञापनदाता को वेरिफिकेशन कराना जरूरी है, ताकि फेसबुक लोगों को चुनावी विज्ञापन से जुड़ी सारी जानकारी दे सके.

ऑनलाइन लाइब्रेरी में दी जाएगी सारी जानकारी
फेसबुक के सिविक मैनेजमेंट में प्रोडक्ट मैनेजमेंट के डायरेक्टर समिध चक्रवर्ती ने एक ब्लॉग पोस्ट में बताया कि, चुनावी विज्ञापन के लिए एक ऑनलाइन लाइब्रेरी बनाई जाएगी जिसे 7 साल तक एक्सेस किया जा सकेगा. उन्होंने बताया कि, इस लाइब्रेरी में चुनावी विज्ञापन के बजट और विज्ञापनदाता की जानकारी के अलावा उम्र, जेंडर और लोकेशन के आधार पर विज्ञापन को कितने लोगों ने देखा, इस बारे में जानकारी होगी .

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फेक न्यूज से लड़ने के लिए दो सेंटर बनाए जाएंगे

फेसबुक ने कहा है कि भारत समेत दुनिया के कई देशों में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए डबलिन और सिंगापुर में दो नए ऑपरेशन सेंटर बनाए जाएंगे, जहां कंपनी की टीम चुनावों पर नजर रखेगी. फेसबुक में ग्लोबल पॉलिटिक्स एंड गवर्नमेंट आउटरिच डायरेक्टर कैटी हरबैथ ने बताया कि, इन सेंटर पर मौजूद टीमें चुनावों के दौरान फैलने वाली फेक न्यूज, हेट स्पीच और वोटरों पर दवाब डालने वाली पोस्ट पर नजर रखेंगी. इनके अलावा थ्रेट इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, इंजीनियरिंग, रिसर्च, कम्युनिटी ऑपरेशंस, लीगल और अन्य टीमें भी मिलकर चुनावों पर नजर रखेंगी, ताकि किसी भी तरह की धांधली और दखलंदाजी को रोका जा सके.

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थर्ड-पार्टी फैक्ट चेकिंग प्रोग्राम का विस्तार करेगी कंपनी

फेसबुक ने ये भी कहा कि वो अपने थर्ड-पार्टी फैक्ट चेकिंग प्रोग्राम का विस्तार करने की तैयारी कर रही है. दरअसल, दुनियाभर में फेसबुक के जरिए फेक न्यूज़ फैलने के आरोप लगने के बाद कंपनी फैक्ट चेकिंग प्रोग्राम शुरू किया था, जिसमें उन थर्ड-पार्टी फैक्ट चेकर्स वेबसाइट को शामिल किया जाता है, जिसे नॉन-पार्टिसन (गैर पक्षपातपूर्ण) इंटरनेशनल फैक्ट चेकिंग नेटवर्क से प्रमाणित किया जाता है. फेसबुक का ये प्रोग्राम भारत समेत 20 से ज्यादा देशों में चल रहा है.

फेसबुक का कहना है कि, अब उनकी टीम आर्टिकल का रिव्यू करने के साथ-साथ फोटो और वीडियो के जरिए फैलने वाली फेक न्यूज का रिव्यू भी करेगी, क्योंकि आजकल ज्यादातर फेक न्यूज फोटो और वीडियो के जरिए ही फैलाई जा रही है. कंपनी का ये भी कहना है कि, अगले 6 महीनों में सिंगापुर, दिल्ली, नैरोबी, बर्लिन, न्यूयॉर्क, मैक्सिको समेत कई जगहों पर फेक न्यूज के खिलाफ वर्कशॉप भी आयोजित करेगी.

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