नई दिल्ली। दिल्ली में दिवाली पहले हवा की क्वालिटी खराब हो गई है। दिल्ली-एनसीआर में लगातार धुंध बढ़ती जा रही है। हालत यह है कि लोग न तो घर में और न ही ऑफिस में शुद्ध हवा में सांस ले पा रहे हैं। लोगों को सभी जगह जहरीली हवा में सांस लेना पड़ रहा है।

इंडियन पलूशन कंट्रोल असोसिएशन की ओर से कराई गई एक स्टडी में यह सामने आया है कि दिल्ली में हवा की गुणवत्ता बहुत ही खराब हो चुकी है। जनवरी से सितंबर 2018 तक इस स्टडी के तहत दिल्ली की 13 महत्वपूर्ण इमारतों का परीक्षण किया गया, जिसमें यह बात सामने आई कि PM 2.5का लेवल नियंत्रित हुआ है, लेकिन हवा में बायो-एरोसोल्स, कार्बन डाइऑक्साइड और नुकसान पहुंचाने वाले ऑर्गनिक कंपाउंड पाए गए। इनका स्तर खतरे से ऊपर था।

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स्टडी में यह बात सामने आई कि एयर प्यूरिफायर्स के इस्तेमाल से PM 2.5 का लेवल घरों के अंदर कम हुआ है, लेकिन अब नुकसान पहुंचाने वाले कंपाउंड और गैसों का स्तर खतरनाक लेवल से अधिक है। हालांकि मल्टीप्लेक्स और अस्पतालों में PM 2.5 का लेवल सबसे कम पाया गया। इसकी वजह यहां पर एयर प्यूरिफायर्स का इस्तेमाल होना है।

स्टडी में यह बात सामने आई कि बायो-एरोसोल्स का खतरनाक स्तर चिंता की बात है। इसमें कई तरह के वायरस, बैक्टीरिया, फंगी, माइक्रोस्कोपिक टॉक्सिन, पोलेन और प्लांट फाइबर्स आदि शामिल होते हैं। घर के अंदर भी इनका खतरनाक स्तर पर होना चिंता की बात है।


सरकारी इमारतों में बायो-एरोसोल्स का लेवल सुरक्षित स्तर से दोगुना पाया गया। कई जगहों पर यह 6,100 CFU प्रति क्यूबिक मीटर पाया गया। यह कॉर्पोरेट ऑफिसेज की स्वीकार्य सीमा से 20 गुना अधिक था। इसी तरह आवासीय और कॉर्पोरेट परिसरों में भी एरोसोल्स का स्तर तय सीमा से अधिक पाया गया।

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