गोवा को मिले नए सीएम, प्रमोद सावंत ने संभाली गोवा की कमान..

सीएम मनोहर पर्रिकर का बीते 17 मार्च को कैंसर के कारण निधन हो गया. जिसके बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ कि गोआ की अगली कमान किसके हाथ में दी जाए. और पर्रिकर के बाद गोवा का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस सवाल का उत्तर मिल गया है. लंबी माथापच्ची के बाद गोवा की कमान विधानसभा स्पीकर प्रमोद सावंत को सौंपी गई है, जिसका औपचारिक शपथग्रहण समारोह गोवा के राजभवन में हुआ. रात 1.50 बजे सावंत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. बता दें कि 63 वर्षीय मनोहर परिकर की रविवार को मृत्यु हो गई थी. वह लंबे समय से पैनक्रियाटिक कैंसर से जूझ रहे थे. सोमवार को उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. मनोहर परिकर के निधन के बाद गोवा में राजनीतिक संकट शुरू हो गया था. एक ओर जहां कांग्रेस राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश कर रही थी तो दूसरी ओर भाजपा के खेमे में भी इसे लेकर चर्चा हो रही थी.

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नवनियुक्त गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि मुझे सभी सहयोगियों के साथ एक स्थिरता के साथ आगे बढ़ना है. अधूरे कामों को पूरा करना मेरी जिम्मेदारी होगी. मैं मनोहर पर्रिकर जी के जितना काम नहीं कर पाऊंगा लेकिन जितना संभव हो सके काम करने की कोशिश करूंगा.

एमजीपी के मनोहर अजगांवकर, बीजेपी के मौविन गोडिन्हो, विश्वजीत राणे, मिलिंद नाइक और निलेश कैबरल, गोवा फॉरवर्ड पार्टी के विनोद पल्येकर और जयेश सालगांवकर और निर्दलीय विधायक रोहन खैतान और गोविंद गावडे ने भी राजभवन में राज्य कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली.

सावंत इससे पहले गोवा विधानसभा के स्पीकर थे. इसके अलावा जानकारी मिली है कि विजय सरदेसाई और सुधीन धवलीकर को डिप्टी सीएम का कार्यभार दिया जाएगा. गोवा में राजनीतिक संकट समाप्त करने के लिए भाजपा पूरी कोशिश कर रही थी. बीते दिनों कांग्रेस द्वारा राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद पार्टी ने विधायकों की बैठक बुलाई थी. सोमवार शाम को भी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, प्रमोद सावंत और गोवा विधायकों के साथ पणजी में बैठक की.

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राज्य में भाजपा ने सहयोगी दलों महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के सुदिन धावलीकर और गोवा फारवर्ड पार्टी (जीएफपी) के विजय सरदेसाई को उपमुख्यमंत्री बनाया है. मनोहर परिकर के निधन के बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को दोनों सहयोगियों को मनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. दरअसल, धावलीकर खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन भाजपा इसके लिए तैयार नहीं थी. डिप्टी सीएम पद मिलने के बाद ही दोनों पार्टियों ने सावंत के नाम पर सहमति जताई.

इसके साथ ही भाजपा ने फिलहाल राज्य की सत्ता में वापसी की कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा में इस समय 36 सदस्य हैं. भाजपा के 12, जीएफपी और एमजीपी के तीन-तीन और तीन निर्दलीय भाजपा के साथ हैं. चूंकि इन सहयोगियों के बिना भाजपा सरकार नहीं बचा सकती थी, लिहाजा इन्हें मनाना जरूरी था। वहीं, कांग्रेस दो बार सरकार बनाने का दावा पेश कर चुकी थी. ऐसे में जल्द से जल्द सुलझाना भाजपा की मजबूरी थी.

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परिकर के निधन के बाद ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी रविवार रात ही गोवा पहुंच गए थे, लेकिन दोपहर तक एमजीपी और जीएफपी को मनाने में नाकाम रहे. इसके बाद सोमवार शाम परिकर के अंतिम संस्कार के बाद अमित शाह ने मोर्चा संभाला और दोनों सहयोगियों को डिप्टी सीएम बनाने का प्रस्ताव रखा.

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