इन दिनों राम मंदिर के निर्माण को लेकर अयोध्या की फिजां बेहद गर्म होती हुई नज़र आ रही है. और ऐसा सुपीम कोर्ट की हालिया सुनवाई में मामले को अगले साल तक के लिए टालने के बाद ज्यादा नज़र आ रहा है. जिसके बाद से ही तमाम हिंदू संगठन और साधु-संत सरकार को इस मुद्दे पर पर विधेयक लाने की मांग कर रहे हैं. लेकिन अब मामले में आग की लपटे तेज हो गई हैं. और जिसके चलते माहौल 1992 जैसा बनता दिख रहा है.

जिसमें सियासी रस्साकशी के साथ अयोध्या में वो हुआ, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. इस दैरान कई शहर जले तो कई घर इस आंच में झुल गए. कई मां की ममता फिकी पड़ गई तो कई सुहागिनो का सिंदूर मिट गया. चारों तरफ अफरा-तफरी माहौल था. भूल से भी अगर आज 25 साल पहले का वो मंजर किसी को याद आ जाता है तो वो ईश्वर से एक ही प्रर्थना करता है कि ऐसा दोबारा कभी न हो.

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लेकिन अब ऐसा ही माहौल 25 नवंबर को अयोध्या में शिवसेना और विश्व हिंदू परिषद की होने वाली धर्म सभा को लेकर बन गया है. जिसमें एक लाख से अधिक की भीड़ जुटने का संभावना जताई जा रही है. जिससे इलाके में डर का साया मंडरा गया है और लोग सहमे हुए नज़र आ रहे हैं. लोग इलाके में हालात बिगड़ने की आशंका को लेकर अभी से ही अतिरिक्त राशन जमा करने में लगे हुए हैं. जिसके चलते प्रशासन ने भी कमर सी ली है. शहर में सुरक्षा के इंतजामात भी चाक-चौबंद कर दिए गए हैं.

फैजाबाद और इसके नजदीक जिलों में जगह-जगह सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स,  और पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं. इसके अलावा पीएसी कंपनी की संख्या 20 से बढ़ाकर 48 कंपनी तैनात कर दी गई हैं. और पूरी अयोध्या छावनी में तब्दील हो गई है. और वहीं योगी सरकार ने साफ कहा कि 25 तारीख को अयोध्या में कोई सभा या रैली नहीं होगी.

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आपको बता दें कि राम मंदिर निर्माण के लिए प्रभु श्री राम की नगरी में VHP ने धर्म संसद बुलाई है, और साथ ही VHP ने  संभावना जताई है कि ये बेहद विशाल धर्म सभा होगी और इसमें एक लाख से ज्यादा लोग हिस्सा लेंगे. जिसकी तैयारियां कई दिनों से की जा रही थीं.

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