नई दिल्ली। सीबीआई चीफ आलोक वर्मा के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हम इस मामले की जांच करेंगे। हमें यह देखना होगा कि सीवीसी की तरफ से किस तरह का आदेश दिया गया है।


सुनवाई के दौरान आलोक वर्मा की तरफ से पैरवी कर रहे फली नरीमन ने कोर्ट के बताया कि सीवीसी और केंद्र सरकार द्वारा सीबीआई अधिकारी को छुट्टी पर भेजना कानून का हनन है। उधर छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा के घर के बाहर से गुरुवार को हिरासत में लिए गए 4 लोगों को आईबी के कबूलनामें के बाद रिहा कर दिया गया।

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आईबी ने उन चारो संदिग्धों के बारे में कहा कि ये चारों उन्हीं के अधिकारी हैं और रूटीन गस्त पर थे। अधिकारी के रिहा होने के बाद केंद्रीय सरकार के तीन बड़ी एजेंसियों की किरकिरी करा दी। दिल्ली पुलिस का रवैया इस मामले में सवालों के घेरे में है।

आलोक वर्मा के सुरक्षाकर्मी पकड़े गए लोगों से जिस तरह से पेश आए इससे भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक सरकारी सुरक्षाकर्मी को इसकी भी ट्रेनिंग नहीं दी जाती कि वह सरकारी अफसर और प्राइवेट आदमी की पहचान कर सके? अगर अधिकारी अपना परिचय दे रहे हैं तो उनसे इस तरह का व्यवहार कैसे किया जा सकता है?

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Amit shah And PM Modi

आलोक वर्मा के आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने पुलिस को इसकी जानकारी दी कि आवास के बाहर से 4 संदिग्धों को पकड़ा गया है। पुलिस पहुंची और उसे थाने ले आई। फिर अचानक आईबी ने कबूल कर लिया कि यह उसी का आदमी है। दिल्ली पुलिस के उस कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं जब दिल्ली पुलिस ने आईबी अफसर की कॉलर पकड़कर उन्हें ले गई थी। सवाल यह भी है कि अगर ये आईबी के ही अधिकारी थे तो फिर उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया।

हालांकि सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा के घर के बाहर से पकड़े गए चारों संदिग्धों के पास से आईबी के आईडी कार्ड मिले हैं। पकड़े जाने के बाद पुलिस ने परिचय, कार्ड नंबर और उनसे बरामद सभी सामानों की लिस्ट जारी कर दी। बाद में आईबी ने कहा कि वे उसके ही आदमी हैं। पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस ने उसे जाने दिया।

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