भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने लैंडर ‘विक्रम’ की लोकेशन का पता लगा लिया है. अब इसरो की टीम लगातार सिग्‍नल भेजकर लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की लगातार कोशिश कर रही है. दरअसल, इसरो को वह फ्रिक्वेंसी पता है, जिस पर विक्रम से कम्युनिकेट किया जाना है. ऐसे में टीम इस उम्मीद के साथ लगातार अलग-अलग कमांड भेज रही है कि विक्रम किसी का तो जवाब देगा. हम आपको बता रहे हैं विक्रम से संपर्क के लिए कौन से तरीके अपनाए जा रहे हैं.

X-Band पर नजर है इसरो विज्ञानिको की. चंद्रयान 2 मिशन से जुड़े एक वैज्ञानिक का कहना है कि कुछ ही ऐसे चैनल है जिसके जरिए लैंडर विक्रम और ग्राउंड स्टेशन से संपर्क साधा जा सकता है. ये है एक्स-बैंड. इसका इस्तेमाल आमतौर पर रडार, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और कम्प्यूटर नेटवर्क के लिए किया जाता है.

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आपको बता दें शनिवार सुबह लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया था. चांद की सतह पर विक्रम ने कहां लैंड किया है इसका पता लग गया है. लेकिन अब तक पांच दिन बीत जाने के बाद भी इससे कोई संपर्क नहीं साधा जा सका है.

बता दें विक्रम से संपर्क करने के लिए इसरो कर्नाटक के एक गांव बयालालु में लगाए गए 32 मीटर के एंटीना का इस्तेमाल कर रहा है. इसका स्पेस नेटवर्क सेंटर बेंगलुरु में है. इसरो कोशिश कर रहा है कि ऑर्बिटर के जरिये विक्रम से संपर्क किया जा सके.

लैंडर पावर जेनरेट कर रहा है या नहीं इस बारे में फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता है. इसरो के चेयरमैन ने कहा है कि वो अभी भी उसके डाटा का एनालिसिस कर रहे हैं. विक्रम को सिर्फ एक लूनर डे के लिए ही सूरज की सीधी रोशनी मिलेगी. इसका मतलब है कि 14 दिन तक ही विक्रम को सूरज की रोशनी मिलेगी. ऐसे में इसरो इन 14 दिन तक अपनी कोशिश जारी रख सकता है. यानी अब लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए इसरो के पास सिर्फ 10 दिनों का समय बचा है.

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