देश ने एक ऐसे दिग्गज को खो दिया है, जिसने पूरी जिंदगी लोगों की भलाई के लिए जिया। उस शख्स का नाम था अरुण जेटली। सांस लेने में परेशानी होने के बाद 9 अगस्त को पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती हुए थे। 24 अगस्त दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वे 66 वर्ष के थे। जेटली ने 14 मई को किडनी ट्रांसप्लांट करवाया था और वे टिसू कैंसर से पीड़ित थे।

अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को नई दिल्ली में हुआ। जेटली वकीलों के परिवार वाली पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके माता-पिता का नाम महाराज किशन जेटली और रतन प्रभा जेटली है। जेटली ने दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके अलावा दिल्ली यूनिवर्सिटी से उन्होंने लॉ में ग्रेजुएशन किया। छात्र जीवन में वह दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्र इकाई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

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जेटली के राजनीति करियर की शुरूआत उनके छात्र जीवन में ही हो गया था। दिल्ली विश्वविद्यालय में एबीवीपी के विद्यार्थी नेता के रूप में जेटली ने छात्र संघ चुनाव में सक्रिय रूप से भाग लिया था और फिर 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष भी बने थे। साल 977 में जनसंघ में शामिल हुए और इसी साल दिल्ली एबीवीपी के अध्यक्ष और एबीवीपी के अखिल भारतीय सचिव बने। वर्ष 1980 में बीजेपी के युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने, 1991 में बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने। 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बने। इसके बाद साल 2000 में वह विधि, न्याय और कम्पनी मामलों एवं जहाजरानी मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री बने। 2002 में बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव का ओहदा मिला, वहीं 2003 में कानून और न्याय मंत्री और उद्योग मंत्री बने। वर्ष 2009 में राज्यसभा में विपक्ष के नेता चुने गए। साल 2014 में जब बीजेपी ने नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लोकसभा चुनाव लड़ा, तब वे पहली बार अमृतसर से लोकसभा चुनाव लड़े। साल 2014 में मोदी सरकार की कैबिनेट में वित्त मंत्री की जिम्मेदारी संभालने के साथ रक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। मोदी की अगुवाई में जब 2019 का लोकसभा चुनाव बीजेपी ने जीता, तब जेलटी ने सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया क्योंकि इस दौर में वे गम्भीर बीमारी से जूझ रहे थे।

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