सोशल मीडिया पर एक महिला पुलिसकर्मी का भाषण वायरल हो रहा है. भाषण इतना जोशीला और सच्चा था कि चंद सैकण्डों में सोशल मीडिया पर आग तरह फैल गया. जिसे लोगों ने जमकर शेयर किया.

अपने दमदार भाषण से देश को हिलाने वाली ये महिला पुलिसकर्मी आखिर है कौन? दरअसल अपने भाषण से देश को जगाने वाली इस महिला पुलिसकर्मी का नाम खुशबू चौहान है. सीआरपीएफ (सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स) की 233 बटालियन में कांस्टेबल हैं. खुशबू ने बेहद जोशीले अंदाज में अर्बन नक्सलवाद पर आवाज उठाई है जिसकी चर्चा अब देश भर में हो रही है.

मिली जानकारी के मुताबिक खुशबू चौहान 27 सितम्बर को दिल्ली में Indo-Tibetan Border Police (ITBP)  ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के लिए एक डिबेट कम्पिटीशन में हिस्सा ले रही थीं. डिबेट का विषय था कि मानव अधिकारों का अनुपालन करते हुए देश में आतंकवाद एवं उग्रवाद से प्रभावी तरीके से निबटा जा सकता है. ये डिबेट बीपीआरएंडडी नई दिल्ली के सभागार में आयोजि‍त की गई थी. जिस पर खुशबू चौहान खुलकर अपनी राय रखी और देश में जवानों की स्थिति को उजागर किया. साथ ही कांस्टेबल खुशबू ने जेएनयू के छात्रों के बारे में अपनी राय भी रखी. वो कहती हैं कि दर्द हद से जब गुजरने लगता है, जब मेरे सामने पुलवामा, ताज छत्तीसगढ़ के सैनिकों के अधजले शरीर और रेत के टीले से बड़े ढेर सामने आते हैं. आजकल तिरंगा फहराने से ज्यादा लपेटने में काम आता है, कलेजा तब फट गया जब एक मां ने कहा कि साहब आप तो आधा इंच भी कम नहीं लेते, मैं आधा बच्चा कैसे ले लूं. आज मानवाधिकारों के कारण हमारे देश के जवान इतने डरे हैं कि वो ड्यूटी में खड़े होकर भी फैसला लेने से डरते है. प्रतियोगिता में उन्होंने जो कहा उसकी चार मिनट की वीडियो सोशल मीडिया में हर तरफ छा गया है.

जरुर पढ़ें:  धारा-370 खत्म होते ही जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में आधी रात ये क्या हुआ!

VK News

Loading...