सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का उनकी जयंती (31 अक्टूबर) पर उद्घाटन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में इसका उद्घाटन हुआ। यह दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है और यह अमेरिका की की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से दोगुनी है। जानते हैं इस मूर्ति से जुड़ी खास बातें…

यह प्रतिमा गुजरात में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मूर्ति की लंबाई 182 मीटर है और इसे 7 किलोमीटर की दूरी से भी देखा जा सकता है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का कुल वजन 1700 टन है। इसके पैर की ऊंचाई 80 फीट, हाथ की ऊंचाई 70 फीट, कंधे की ऊंचाई 140 फिट और चेहरे की ऊंचाई 70 फिट है।

इस मूर्ति का निर्माण राम वी. सुतार की देखरेख में पूरा हुआ है। अब सुतार शिवाजी की मूर्ति की डिजाइन कर रहे हैं।सरदार पटेल की इस मूर्ति को बनाने में करीब 3 हजार करोड़ रुपये का खर्च आया। इस स्मारक की आधारशिला 31 अक्टूबर, 2013 को पटेल की 138वीं वर्षगांठ के मौके पर रखी गई थी, जब पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

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इस मूर्ति के कंस्ट्रक्शन को चार चरणों में पूरा किया गया है। (1) मॉक-अप, (2) 3डी (3) स्कैनिंग तकनीक, (4) कंप्यूटर न्यूमैरिकल कंट्रोल प्रोडक्शन तकनीक। मूर्ति के नीचे के हिस्से को ऊपर के हिस्से की तुलना में थोड़ा पतला किया गया है। मूर्ति भूकंपरोधी है। यह 6.5 तक का भूकंपीय झटका सह सकता है।

आपको बता दें, यह स्टैच्यू 180 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवा में भी स्थिर खड़ा रहेगा। इस मूर्ति के निर्माण में भारतीय मजदूरों के साथ 200 चीन के कर्मचारियों ने भी हाथ बंटाया है। इन लोगों ने सितंबर 2017 से ही दो से तीन महीनों तक अलग-अलग बैचों में काम किया।

मूर्ति के निर्माण के लिए केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद अक्टूबर 2014 मेंलार्सन एंड टूब्रो कंपनी को ठेका दिया गया था। मूर्ति के निर्माण में करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के ऊपर जाने के लिए लिफ्ट लगेगी।5700 मीट्रिक टन स्ट्रक्चरल स्टील और 18500 मीट्रिक टन रिइनफोर्समेंट बार्स से बनी इस मूर्ति में लेजर लाइटिंग लगेगी, जो इसकी रौनक हमेशा बनाए रखेगी।

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इस मूर्ति तक आपको नांव के जरिए पहुंचना होगा। एक दैनिक अखबार के मुताबिक, इसका दीदार करने के लिए 300 रुपये फीस का भुगतान भी करना होगा। सरदार वल्लभ भाई पटेल की इस मूर्ति में 4 धातुओं का उपयोग किया गया है जिसमें बरसों तक जंग नहीं लगेगी। स्टैच्यू में 85 फीसदी तांबा का इस्तेमाल किया गया है।

सरदार पटेल की मूर्ति में एक लाख 70 हजार क्यूबिक मीटर कॉन्क्रीट लगा है। साथ ही दो हजार मीट्रिक टन ब्रॉन्ज लगाया गया है। यह मूर्ति 22500 मीट्रिक टन सीमेंट से बनी है। इस विशाल प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर है। इस मूर्ति को बनाने में करीब 44 महीनों का वक्त लगा है।

इस मूर्ति को बनाने के लिए लोहा पूरे भारत के गांव में रहने वाले किसानों से खेती के काम में आने वाले पुराने और बेकार हो चुके औजारों का संग्रह करके जुटाया गया। इसके लिए एक ट्रस्ट भी बना “सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट”। इसकी नींव 2013 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। इस मूर्ति में दो लिफ्ट भी लगी है, जिनके माध्यम से आप सरदार पटेल की छाती पहुंचेंगे और वहां से आप सरदार सरोवर बांध का नजारा देख सकेंगे।

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इस मूर्ति को देखने के लिए आपको पैसा भी खर्चा करना पड़ेगा। टिकट की दो कैटेगरी बनाई गई है, जिसमें एक गैलरी देखने के लिए 380 रुपए और एक बिना गैलरी वाली टिकट 150 रुपये है जिसमें बस का 30 रुपए किराया भी है। बता दें कि 120 रुपये की टिकट में आप मूर्ति के पास तक जा सकते हैं, लेकिन ऊपर नहीं जा पाएंगे।

हालांकि 120 रुपये के टिकट में आप म्यूजियम और वैली ऑफ फ्लॉवर देख सकेंगे। वहीं अगर कोई शख्स ना ही वैली ऑफ फ्लॉवर देखना चाहता है और ना ही म्यूजियम, तो वह 30 रुपये में मूर्ति तक जा सकता है। इसके लिए आप www.soutickets.in पर जाकर टिकट भी बुक करवा सकते है।

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