दो अक्तबूर किस लिए खास है…? सबको पता है कि इस दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म हुआ था। लेकिन ये दिन एक और वजह के लिए भी जाना जाता है। क्या आपको पता है, कि भारत मशहूर और बड़े ब्रांड महिंद्रा आटोमोबाइल की शुरूआत इसी दिन हुई थी।

साल था आजादी से दो साल पहले यानी 1945… इस कंपनी का नाम शुरू में महिंद्रा एंड महिंद्रा नहीं था। जब इसे शुरू किया गया तो इसका नाम था महिंद्रा एंड मुहम्मद इसकी वजह थी। इस कंपनी के पार्टनर महिंद्रा ने ये कंपनी पार्टनरशिप में शुरू की थी और इस कंपनी में उनके एक पार्टनर थे मलिक गुलाम मोहम्मद।  

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लेकिन 1947 में जब बंटवारा हुआ और भारत से पाकिस्तान अलग हुआ तो मोहम्मद साहब पाकिस्तान चले गए। ये मोहम्मद साहब कोई और नहीं बल्कि पाकिस्तान के पहले वित्त मंत्री ही थे। जब गुलाम मोहम्मद कंपनी से अलग हुए तो कंपनी का नाम बदलना जरूरी हो गया। इसलिए कंपनी का नाम जब बदलने की बारी आई तो महिंद्रा ने कंपनी के नाम से मोहम्मद हटाकर महिंद्रा ही लगा लिया।

इसके पीछे की वजह भी बड़ी दिलसचस्प है। इस रहस्य का खुलासा खुद महिंद्रा ग्रुप के कार्यकारी अध्यक्ष आनंद महिंद्रा ने किया है।

दरअसल कंपनी उस वक्त बहुत ज्यादा खर्चे में नहीं पड़ना चाहती थी और वो बेहद कम खर्चे में काम चलाने में यकीन रखती थी। कंपनी का लोगो एम एंड एम नाम से पहले से बन चुका था और इसकी स्टेशनरी और दूसरी चीजें बड़ी तादात में छप चुकी थी। अगर कपंनी का नाम बदला जाता तो कपंनी के लोगो के साथ ही ये सारी स्टेशनरी बेकार हो जाती और लाखों रुपए का फिर खर्च होता। इसी से बचने के लिए उन्होंने कंपनी का नाम ‘महिंद्रा एंड महिंद्रा’ कर दिया।

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कंपनी के नाम में ऐसा बदलाव करने की वजह से उसका शॉर्ट नेम एमएंडएम ही बना रहा। जिसकी वजह से न लोगो बदलना पड़ा और न ही स्टेशनरी दोबारा छापनी पड़ी क्योंकि उसमें एमएंडएम ही छपा हुआ था, न कि मंहिंद्रा एंड मोहम्मद।

ये एक अच्छी किफायती सोच की नज़ीर भी है और इससे हर कोई सीख सकता है कि कैसे आप किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं। आपको बता दें कि कंपनी को दो अक्टूबर 1945 के दिन ही रजिस्ट्रेशन का प्रमाणपत्र मिला था। इसलिए इस दिन ही कंपनी अपना स्थापना दिवस मनाती है। महिंद्रा ने गांधी जयंति पर इसे शेयर करते हुए कंपनी के पहले विज्ञापन को भी साझा किया।

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