एक पिता के लिए बेटी क्या मायने रखती है ये उससे बेहतर कोई नहीं बता सकता, भाई के बाद लड़की अगर किसी के साथ सबसे ज्यादा सुरक्षित मेहसूस करती है, तो वो है, उसके पिता। क्योंकि ये रिश्ता ही कुछ ऐसा है। लेकिन एक मौलवी इस रिश्ते को भी नापाक करने पर तुला है, उस मौलवी की माने तो अगर पिता चाहे तो वो बेटी के साथ शादी कर सकता है।

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यकीनन ये बात सुनकर आपका खून खौल गया होगा, कि समाज में जिस रिश्ते को बाप-बेटी के बीच का प्यारा संबंध माना जाता है, लोग उसी रिश्ते के लिए इस तरह की बातें कर, अपनी गंदी सोच दुनिया के सामने लाते हैं। हैरानी तो इस बात की होती है, कि इस तरह की बातें करने वाले कोई रोड़ पर चलते-फिरते राहगीर नहीं बल्कि जाने-माने लोग और धर्म गुरु होते हैं। आपको बता दें, कि हाल ही में मिस्त्र के मुल्ला माजेन अल सेलसावी का एक वीडियो सामने आया है, जो वायरल तो 2012 में हुआ था, लेकिन एक बार फिर उसे दोबारा दोहराया जा रहा है, वो भी 2017 में। इस वीडियो की हर जगह अलोचना हो रही है, क्योंकि वीडियो में ही ऐसा है कि जो सुने वो उसकी अलोचना किए बिना या उस इंसान की सोच पर थू-थू ना करें।

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मुल्ला माजेन अल सेरसावी

जीहां, इस वीडियो में मुल्ला माजेन अल सेरसावी ने ये बयान दिया है कि अगर बेटी अवैध या गैर-कानूनी रुप से पैदा हुई हो तो, पुरुष अपनी बेटी से निकाह कर सकते है यानी नाजायज तरीके से जन्मी लड़की का बाप, बाप नहीं होता है वो चाहे तो उसे निकाह कर सकता है या उसके शारीरिक संबध बना सकता है। वही, ऐसे बयानों का साथ देते हुए मिस्त्र के जाने-माने कट्टरपंथी इस्मलामिक धार्मिक उपदेशक इमाम अल शाफी ने कहा कि कुरान में रुग्ण अभ्यास की अनुमति देता है। यानी कुरान में इस बात का व्याख्यान किया गया है। ऐसे ही बड़े-बड़े धार्मिक उपेदशकों के बयान के बाद मिस्त्र के अल अजहर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने कहा कि

एक बच्ची का जन्म अवैध या गैरकानूनी रुप से हुआ हो, तो उसे पिता की वास्तविक बेटी का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। शरीया कानून के अनुसार वो उसकी बेटी नहीं है। उसे आधिकारिक तौर पर उसे जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है।

यानी अगर कोई लड़की गैर-कानूनी तरीके से पैदा होती है, तो उसके मुंह-बोले बाप को ये अधिकार है, कि वो उसके साथ सेक्स कर सकता है, इन लोगों की बातें सुनकर तो ऐसा लगता है, कि शायद इन्होंने रिश्ते कानून के हिसाब से तैयार किए हैं। जिनमें ना किसी लड़की की इज्जत है और ना ही उसका कोई हक है। बस वो एक बेजान औरत है, जिसके लिए कोई भी किसी भी तरह का नियम लागू करो और वो उसे मानना पड़े। ऐसे लोगों की सोच ही बताती है, कि क्यों बलात्कार, घरेलू हिंसा, बालविवाह, यौन हत्याएं देश में रुकने का नाम नहीं ले रही है।

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हालांकि लड़कियों की इस तरह की बेइज्जती आज पहली बार नहीं हुई है, इससे पहले भी कई ऐसे कानून और बयान दिए है, जिन्होंने लड़कियों के लिए कई सवाल खड़े किए हैं। मिस्त्र के धर्म गुरुओं ने पहले कभी ये कहा था कि, शरिया कानून में लड़कियों की शादी की कोई उम्र नहीं होती है ऐसे में उनके पैदा होते ही उनसे कोई भी निकाह कर सकता है। यही नहीं लड़कियों के लिए ये भी कहा जा चुका है, कि उन्हें ड्राइव नहीं करनी देनी चाहिए क्योंकि उनमे पुरुषों के मुकाबले कम दिमाग होता है, उनका दिमाग एक चौथाई होता है और कोई शैतान ही महिलाओं को ड्राइव करने की अनुमति दें सकता है।

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