डॉक्टर्स के भारी विरोध के बाद भी लोकसभा के बाद राज्यसभा से नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल पारित हो गया है। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इस बिल को कानूनी जामा पहना दिया जाएगा। देश में मेडिकल शिक्षा का जिम्मा अब इसी 25 सदस्यीय आयोग के पास होगा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने बिल को लेकर जोरदार देशव्यापी विरोध किया था।

गौरतलब है कि इस बिल के विरोध में देशभर के डॉक्टर एक दिन की हड़ताल पर भी गए थे। आईएमए को बिल के कुछ प्रावधानों पर ऐतराज है। एसोसिएशन का कहना है कि इस बिल के जरिए सरकार उन गरीब छात्रों को डॉक्टर बनाने से रोक देगी।

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दरअसल, आईएमए को बुनियादी तौर दो बिंदुओं पर ऐतराज है। सरकार ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटों में 50 फीसद सीटों पर मैनेजमेंट को फैसला लेने का अधिकार दिया है। दूसरी व्यवस्था ये है कि एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने वालों को प्रैक्टिस करने के लिए एग्जिट टेस्ट पास करना होगा। अब तक यह व्यवस्था उन छात्रों के लिए थी जो विदेशों से एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर भारत में प्रैक्टिस करना चाहते थे।

एनएमसी बिल 2019 ने 1956 में बनाए गए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को समाप्त करने का प्रावधान है। दरअसल मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया में वर्ष 2010 में भ्रष्टाचार के मामले सामने आए थे। एमसीआई के अध्यक्ष रहे केतन देसाई के खिलाफ सीबीआई ने केस भी दर्ज किया था। इस बिल में नेशनल मेडिकल कमीशन बनाए जाने का प्रावधान है। नेशनल मेडिकल कमीशन को नए मेडिकल कॉलेजों को खोलने और पुराने कॉलेजों के मूल्यांकन की जिम्मेदारी होगी। इसके साथ ही कमीशन प्रवेश परीक्षा और एग्जिट टेस्ट भी कराएगा।

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