मोबाइल आज हरएक की लाइफ का अहम हिस्सा है. इसके बिना कोई भी काम मुश्किल सा लगता है। छोटा हो या बड़ा हर किसी के हाथ में मोबाइल आपको दिख जाएगा. अब जितने ज्यादा मोबाइल होंगे या उनके यूजर्स होंगे तो उतने सिम कार्ड या नंबर भी होंगे. लेकिन यहां आपके लिए काम की बात ये है कि आप जो मोबाइल नंबर यूज करते हैं वो अब दस नहीं बल्कि ग्यारह डिजट का होगा.

मोबाइल इस्तेमाल करने वालों की सख्यां दिनों दिन बढ़ती जा रही है, जिसकी वजह से अब फोन नंबर कम पड़ने लगे हैं. जितने ज्यादा मोबाइल यूजर्स उतने ही ज्यादा नंबर्स लेकिन अब फोन नंबर मोबाइलों की संख्या के मुकाबले कम पड़ने लगे है. जिसकी वजह से अब आपका फोन नंबर दस नंबरों के बजाय ग्यारह नंबरों का होगा.

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दरअसल TRAI  यानी  टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया मानना है कि मोबाइल कनेक्शंस की बढ़ती संख्या की वजह से 10 डिजिट वाले मोबाइल नंबरों की मौजूदा व्यवस्था को बदलने का वक्त आ गया है. सिर्फ मोबाइल फोन ही नहीं, बल्कि फिक्स्ड लाइन नंबर भी 10 डिजिट नंबरिंग में बदले जा सकते हैं. इसके अलावा अगर डोंगल कनेक्शन को अपडेट कर 10 से 13 डिजिट बनाया जाता है तो, 3, 5 और 6 नंबर सीरीज़ से शुरू करने में मदद मिलेगी.

बता दें, टेलिकॉम कनेक्शंस की तेजी से बढ़ रही डिमांड इसकी अहम वजहों में से एक है. दरअसल ट्राई ऐसे कई ऑप्शन पर काम करना चाहती है जिसमें से एक मोबाइल नंबरिंग सिस्टम को बदलना भी शामिल है. इसी के साथ मौजूदा 9, 8 और 7 से शुरू होने वाले मोबाइल नंबर्स के साथ करीब 210 करोड़ नए टेलिकॉम कनेक्शन दिए जा सकते हैं.

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सिर्फ इतना ही नहीं साल 2050 तक देश में मौजूदा नंबर्स के अलावा करीब 260 करोड़ नए नंबरों की जरूरत पड़ने वाली है. ये सब बढ़ती आबादी और मोबाइल यूजर्स के कारण हो रहा है. बता दें कि सरकार मशीनों के बीच इंटरनेट आफ दी थिंग्स के लिए 13 अंकों वाली नंबर श्रृंखला पहले ही शुरू कर चुकी है.

ये कोई पहल बार नहीं है कि भारत अपने नंबरिंग सिस्टम को बदलने जा रहा है इससे पहले भी  भारत ने अपने नंबरिंग सिस्टम को दो बार बदला है, जो कि 1993 और 2003 में हुआ था. उस समय 2003 में नंबरिंग प्लान से 75 करोड़ नए फोन कनेक्शंस क्रिएट किए गए थे. इसमें से 45 करोड़ सेल्युलर और 30 करोड़ लैंडलाइन फोन नंबर शामिल थे.

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आपको बता दें एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्राई ने मौजूदा फोन नंबर के 10 डिजिट की जगह 11 डिजिट करने के बारे में लोगों की राय मांगी है. ट्राई ने इस बारे में एक डिस्कशन लैटर जारी किया है जिसका टाइटल है ‘एकीकृत अंक योजना का विकास.’ ये योजना मोबाइल और लैंडलाइन दोनों लाइनों के लिए है.

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