विजय दशमी के मौके पर नागपुर में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अयोध्या में राम मंदिर को लेकर जो बयान दिया, उसने पूरे देश में सियासी माहौल को गर्म कर दिया है. अभी तक मोदी सरकार के अपने लोग ही उनपर इस मामले को लेकर चौतरफा दबाव बना रहे थे, लेकिन संघ प्रमुख इस ताबूत में आखिरी कील ठोंक दी. दरअसल संघ प्रमुख ने कहा, कि राम मंदिर के निर्माण के लिए मोदी सरकार को सदन में क़ानून लाना चाहिए और अयोध्या में रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ कर देना चाहिए.

मोहन भागवत

वैसे भी पीएम मोदी और उनकी सरकार पर मंदिर निर्माण को लेकर दबाव कम नहीं है. एक तरफ संतों ने भी मोर्चा खोल दिया है, और वे तुरंत राम मंदिर के निर्माण की मांग कर रहे हैं. वहीं बीजेपी के कई बड़े नेता भी इस बात की वकालत करते रहे हैं. अब इस आग में मोहन भागवत की स्वीकृति ने घी का काम किया है. वहीं दशकों से जो पार्टी राम के नाम को जपकर बड़ी हुई हो उसके कार्यकर्ताओं को भी जवाब देना बीजेपी के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है.

आपको बता दें, कि संतों के एक बड़े धड़े और राम मंदिर आंदोलन से संतों ने इसी साल 6 दिसंबर से अयोध्या में मंदिर के निर्माण का एलान कर दिया है. संत समाज का चेतावनी दी है, कि वे मंदिर निर्माण शुरू कर देंगे, सरकार रोकना चाहती है तो रोक लें. वैसे केंद्र और राज्य की सरकारों के लिए संतों को रोकना मुश्किल होगा और इससे बीजेपी को समर्थकों और हिंदू वोटर्स के बीच खासा नुकसान भी झेलना पड़ सकता है. ऐसे हाल में बीजेपी के पास एक ही रास्ता बचता है.
राम मंदिर के लिए संतों का प्रदर्शन

बीजेपी राम मंदिर के लिए अपनी प्रतिबद्धता को जाहिर करने के लिए सरकार के जरिए सदन के आने वाले शीतकालीन सत्र में राम मंदिर के विधेयक को लाए. इससे बीजेपी को फायदे ही फायदे हैं. पहला तो ये कि चुनाव से पहले सरकार समर्थकों के बीच ये संदेश देने में कामयाब होगी कि उसकी मंशा राम मंदिर के लिए सकारात्मक है. दूसरा ये है कि राम नाम की माला जप रहे और मंदिर-मंदिर माथा टेक रही कांग्रेस के साथ ही पूरे विपक्ष के लिए ये एक सहज स्थिति नहीं होगी. विपक्ष इसपर बंटेगा. और बीजेपी को फायदा ही फायदा होगा.वैसे भी आने वाला शीतकालीन सत्र मोदी सरकार का अाखिरी सत्र है. इसके बाद होने वाला बजट सत्र मध्यावधि बजट के साथ खत्म हो जाएगा.

जरुर पढ़ें:  इस गणतंत्र दिवस पर जानिए किस-किस को मिला भारत रत्न?
Loading...