आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार के लिए कोई राहत की खबर नहीं आ रही, बल्कि ऐसे में रेटिंग एजेंसी मूडीज इंवेस्टर्स सर्विस ने चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर के अनुमान को घटा दिया है। पहले एजेंसी ने 5.8 फीसदी का अनुमान लगाया था, लेकिन अब इसमें 0.2 फीसदी की कटौती करते हुए 5.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था।

मूडीज ने बयान जारी करते हुए हम भारत के विकास दर अनुमान को घटाकर के इतना कर रहे हैं। 2018 में विकास दर के लिए कंपनी ने 7.4 फीसदी का अनुमान लगाया था।मूडीज ने कहा है कि उसका अनुमान है कि 2020 में विकास दर 6.6 फीसदी और 2021 में 6.7 फीसदी रहेगी।

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भारत में आर्थिक गतिविधियों में 2018 के मध्य महीनों से लगातार कमी देखने को मिल रही है। इस वजह से विकास दर आठ फीसदी से खिसककर दूसरी तिमाही में पांच फीसदी पर आ गई। बेरोजगारी बढ़ने का असर भी विकास दर में देखने को मिल रहा है।मांग में कमी के चलते फैक्ट्रियों में उत्पादन काफी कम हो गया, जिसके चलते कई सेक्टर की हालत खराब हो गई है।

मूडीज ने विदेशी मुद्रा रेटिंग को बीएए2 को बरकारर रखा, लेकिन मार्च 2020 में समाप्त वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तुलना में 3.7 फीसदी राजकोषीय घाटा रहने का अनुमान जाहिर किया। वहीं सरकार का अनुमान 3.3 फीसदी राजकोषीय घाटे का है। माना जा रहा है कि सुस्त विकास दर और कॉरपोरेट कर में कटौती के चलते राजस्व घटने से राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर सरकार को झटका लग सकता है।

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मूडीज ने एक बयान में कहा कि इस आउटलुक से आर्थिक कमजोरी का समाधान निकालने में सरकार और नीतियों का आंशिक असर जाहिर होता है, जिससे पहले से ऊंचे स्तर पर बना हुआ कर्ज और बढ़ गया है। इससे पहले वैश्विक व्यापार गतिरोध के बीच उपभोक्ता मांग और सरकारी व्यय में कमी के चलते अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में पांच फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जो 2013 के बाद सबसे कमजोर रही थी।

मूडीज के क्रेडिट रेटिंग आउटलुक नकारात्मक किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था के बुनियादी तत्व मजबूत बने हुए हैं और हाल में किए गए सुधारों से आगे निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।

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गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के खुदरा कारोबार, कार कंपनियों, घरों की बिक्री और भारी उद्योगों की मुश्किलें बढ़ने के साथ भारत का विकास अनुमान लगातार घट रहा है।

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