नई दिल्ली। नवरात्रि की शुरुआत 10 अक्टूबर से होने जा रहा है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि में पहले दिन शैलपुत्री रूप की पूजा की जाती है। इसी दिन कलश स्थापना भी की जाती है। लेकिन इस बार शैलपुत्री और ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा एक ही दिन होगी।

कैसे करें कलश स्थापना-

कलश स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध कर लेना चाहिए। एक लकड़ी का फट्टा रखकर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछाना चाहिए। इस कपड़े पर थोड़ा- थोड़ा चावल रखना चाहिए। उसके बाद भगवान गणेश का स्मरण करना चाहिए। तत्पश्चात एक मिट्टी के पात्र में जौ बोना चाहिए। फिर पात्र के ऊपर जल से भरा कलश की स्थापना करना चाहिए।

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उसके बाद कलश पर रोली से स्वस्तिक या ऊं बनाना चाहिए। कलश के मुख पर रक्षा सूत्र बांधना चाहिए। कलश में सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखने चाहिए। ढक्कन से कलश का मुंह बंदकर चावल रखना चाहिए। उसके बाद एक नारियल को चुनरी से लपेटकर रक्षा सूत्र बांधना चाहिए। इसी नारियल को कलश के ढक्कन पर रखते हुए सभी देवताओं का आहवाह्न करना चाहिए।

किस दिशा में करें घट स्थापना-

वास्तुशास्त्र के अनुसार घर के पूर्व व उत्तर के बीच का स्थान धार्मिक क्रियाओं और पूजा करने के लिए श्रेष्ठ माना गया है। अत: इसी दिशा में घट स्थापना को श्रेष्ठ माना गया है।

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