लोकसभा चुनाव के लिए अब कुछ ही महीने बचे हैं. जिसको लेकर तमाम राजनीतिक दलों ने अभी से ही तैयारीयां शुरु कर दी हैं. तो वहीं बीजेपी भी पांच राज्यों  के विधानसभा चुनाव में हारने के बाद, लोकसभा चुनाव के लिए अभी से कमर कसती हुई नज़र आ रही है.

जिसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालही में कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश के रायबरेली में पहली बार जनसभा की, और साथ ही पीएम मोदी की पहली बार रायबरेली में होने वाली इस सभा को लेकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था.

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ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि पीएम मोदी की इस सभा को सुनने के लिए हूजूम देखने को मिलेगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. आलम ये था कि जनसभा स्थल पर लगाई गई अधिकांश कुर्सियां खाली देखने को मिलीं. और ऐसा तब देखने को मिला जब खुद सीएम योगी इस पूरे आयोजन की मॉनिटरिंग कर रहे थे. और यही नहीं बल्कि इस कार्यक्रम को प्रधानमंत्री की तय समय से एक घंटा देरी से शुरू किया गया. वो इसलिए क्यों इसमें भीड़ जुट सके. लेकिन तब भी भीड़ नहीं जुट पाई. और सारे कयास और दावे महज एक कल्पना में ही तब्दील हो गए.

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आपको बता दें कि प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी का ये पहला रायबरेली दौरा था. इसलिए भाजपा नेताओं खासकर सीएम योगी ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए नेता और कार्यकर्ताओं को ठोस निर्देश दिए थे. और जिसको लेकर भाजपा के पदाधिकारियों ने एड़ी-चोटी का जोर भी लगा दिया था. लेकिन उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुट पाई. और इस रैली में लगभग 10 से 15 हजार लोग ही जुट पाए.

और साथ ही जनसभा करने से पहले पीएम मोदी मॉडर्न रेल कोच फैक्ट्री पहुंचे. जहां उन्होंने फैक्ट्री में बनाए गए 900वें कोच और एक हमसफर कोच को हरी झंडी दिखाई. इसके अलावा पीएम मोदी ने वहां कई विकास योजनाओं का भी शिलान्यास और लोकार्पण किया.

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पीएम की इस रैली में भीड़ न जुटने को लेकर आपको क्या लगता है. क्या भाजपा नेताओं ने इसके लिए तैयारियां मजबूत ढंग से नहीं की. या ‌फिर प्रधानमंत्री मोदी का जादू अब आम जनता में फीका पड़ने लगा है.

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