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(प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारत इन दिनों अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करने में जुटा हुआ है. भारत सरकार दुश्मन के दांत खट्टे करने के लिए सैन्य क्षेत्र में एक के बाद एक फैसला ले रही है. जहां हाल ही में वायुसेना ने अपनी ताकत बढ़ाते हुए अपने बेड़े में आठ अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर को शामिल किया तो वहीं इससे पहले अपने बेड़े में चिनूक हेलिकॉप्टरों को शामिल किया था.

चिनूक हेलिकॉप्टरों को फरवरी 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले के ठीक बाद वायुसेना के बेड़े में शामिल किया गया था. भारत ने इन दोनों हेलिकॉप्टरों को अमेरिका से खरीदा है और इन्हें भारतीय सेनाओं की भविष्य की जरूरतों के हिसाब से विशेषतौर पर तैयार किया गया है.

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तो वहीं भारत को फ्रांस से राफेल जेट मिलने से पहले यूरोप की मिसाइल कंपनी एमबीडीए का कहना है कि मिटिऑर और स्काल्प मिसाइलों के चलते यह बेहद मारक हो गया है. राफेल में तैनात इन मिसाइलों के चलते भारत के पास लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता हो जाएगी. इससे भारत एशियाई क्षेत्र में मजबूत हवाई ताकत के तौर पर उभरेगा. भारत को 59,000 करोड़ रुपये की लागत पर मिलने वाले 36 राफेल जेट्स में तैनात मिटिऑर और स्काल्प मिसाइलें भारत को हवा से हवा में मार करने की अद्भुत क्षमता प्रदान करेंगी. ये दोनों मिसाइलें राफेल जेट का अहम आकर्षण हैं.

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एमबीडीए के इंडिया चीफ लुइक पीडेवाशे ने कहा, ‘भारत को राफेल एयरक्राफ्ट के जरिए नई क्षमता मिलेगी, जो अब तक उसके पास नहीं थी. स्काल्प और मिटिऑर मिसाइलें भारतीय वायुसेना के लिए गेमचेंजर साबित होंगी.’ फ्रेंच कंपनी दसॉ एविएशन के साथ करार के तीन साल बाद मंगलवार को डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह औपचारिक तौर पर पेरिस में भारत के लिए पहला राफेल जेट रिसीव करेंगे. इससे पहले वो राफेल जेट में उड़ान भी भरेंगे.

लुइक ने कहा, ‘राफेल एक शानदार एयरक्राफ्ट है, जिसमें जबरदस्त और मारक हथियार शामिल हैं. दुनिया भर के कई देशों में यह बेहद अहम साबित हुए हैं. भारत को 36 राफेल सप्लाई का हिस्सा बनकर हम बेहद खुश हैं.’ उन्होंने कहा कि मिटिऑर को विजुअल रेंज मिसाइल के तौर पर दुनिया में सबसे मारक माना जाता है. इसके अलावा स्काल्प की बात करें तो यह काफी अंदर तक जाकर मार करने में सक्षम है. इन दोनों मिसाइलों से भारत के पास क्षेत्र में निर्णायक हवाई क्षमता मौजूद होगी.

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