नेताओं को छोटी सी भी चोट लग जाने की खबर को मीडिया लगातार चलाती है . लेकिन क्या जब एक मूर्धन्य यानि कि ज्ञानवान की मौत हो जाती है तो मीडिया उनकी खबर केवल कुछ क्षण ही चलाकर क्यों छोड़ देती है. ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे की वजह क्या है. एक कहावत है कि अन्धेर नगरी चौपट राजा. यानि जब हमारे देश के लोगों को राजनीति ही पसन्द है तो मीडिया तो ऐसी खबरें को दिखायेगा ही.

एसपी सुरेंद्र दास

एसपी सुरेंद्र दास की मौत की खबर तो कहीं न कही टीवी में देखी होगी या फिर अखबार में पढ़ी ही होगी.  दरअसल हाल ही में घर की किसी कलह के चलते कानपुर एसपी सुरेंद्र दास ने जहर खा लिया और करीब पांच दिनों तक चले उपचार के बाद मौत से जंग आखिरकार हार गये. एसपी की मौत के बाद प्रदेश के पुलिस के आला अफसरों से लेकर राजनेताओं तक शोक की लहर दौड़ गई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओम प्रकाश सिंह ने आईपीएस के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया.

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एसपी सुरेन्द्र दास के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए

इस सबके बीच जब पुलिस ने जांच शुरु की तो घर से छोटी पर्ची में लिखा एक सुसाइड नोट मिला जिसमें लिखा था.. रवीना, आई लव यू , यू आर नॉट रिस्पांसिबल फॉर माई सुसाइड। बता दें कि शुरुआती जांच में तो ये सामने आया कि सुरेंद्र कुमार दास और उनकी पत्नी रवीना में अक्सर किसी बात को लेकर लड़ाई होती थी। वे जब तनाव में होते थे या पत्नी से वाद- विवाद होता था तब सर्वेंट और अन्य कर्मचारियों को घर से बाहर कर दिय़ा जाता था।

एसपी सुरेन्द्र दास का लिखा हुआ सुसाइड नोट

यही नहीं बल्कि एसपी दास की पत्नी पर परिवार ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि रवीना परिवार को बिल्कुल पसंद नहीं करती थी और मां से ना मिलने के लिए एसपी पर दबाव बनाती थी। खैर पुलिस ने फिलहाल एसपी सुरेन्द्र दास के आवास में ताला लगा दिया है। चाभी एक राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है। ऐसा इसलिए किया गया है जिससे सबूत के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ ना की जा सके। बाकी सारी पोल पुलिस के हाथ पुख्ता सबूत लगने पर खुलेगी.

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एसपी सुरेन्द्रास की अन्तिम विदाई

आखिर कठिन परिश्रम के बाद अधिकारी बनने वाले युवा आत्महत्या को गले क्यों लगा रहे है..युवा आधिकारीयों मेंआत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति परिवार, समाज और देश के लिए चिंता का विषय है. सरकार को इस तरह की प्रवृत्ति पर रोक लगानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी युवा अधिकारी मौत को गले न लगाये ताकि देश की प्रगति में ऐसे युवा अधिकारियों का सहयोग मिलता रहे..

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