रैलियां होती हैं, रैलियों में भीड़ होती है और उस भीड़ से ही नेता अपनी ताकत दिखाते हैं. ये भीड़ कहां से आती है, इसके ऊपर कई बार सवाल उठते रहते हैं. आज हम आपको कांग्रेस कि एक ऐसी ही भीड़ के बारे मे बताएंगे. जिसमें देश के बापू महात्मा गांधी के सपनों का भारत रोता नजर आ रहा था. इंसानियत कहीं दूर कौने में बैठकर बापू से सवाल पूछ रही थी की बापू क्या ये आपके सपनो का भारत है. जहां आपके नाम को पूजा जाना था, वहां आपके नाम को बेचा जा रहा है.

खबर ये है कि महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लखनऊ में पार्टी की एक बड़ी पदयात्रा का नेतृत्व किया. इस दौरान भारी संख्या में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और 3 किलोमीटर तक मार्च निकाला. लेकिन, इस दौरान सभी लोगों का ध्यान महात्मा गांधी का वेश धारण किए लोगों  की ओर था. ये लोग नंगे पैर सड़क पर मार्च कर रहे. महात्मा गांधी के भेष में 100 से ज्यादा लोगों को तैयार किया गया था और इन सब लोगों को पड़ोसी जिलों से लाया गया था और ये दिहाड़ी मजदूर थे.

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ये बात सुन कर हैरान मत होइएगा क्योंकि आगे जो बता रहा हूं वो सुन कर आपको गुस्सा भी आएगा और आप कांग्रेस को खरी-खरी सुनाएंगे भी क्योंकि कांग्रेस के नेताओं ने इन दिहाड़ी मजदूरों को महात्मा गांधी के अवतार में उतारने के लिए मेकअप और पोशाक दी लेकिन जब ये कार्याक्रम खत्म हो गया. तो इन मजदुरों से इन्हें दिया गया गोल चश्मा, एक लाठी, सिर को ढंकने वाला कपड़ा, सफेद दुपट्टा और धोती उनसे छीन ली। सोचकर देखिए, रैलियो में, रोड शो में नेताओ के मंचों पर लाखों रुपए के फूल लगाने वाले ये नेता एक गरीब को 100-150 रुपए की एक धोती भी नहीं दे सके. वो भी उनके बदन से छीन ली. उन्हें पूरे 3 किलोमीटर तक नंगे पांव चलाया गया सिर्फ बापू के नाम का राजनीतिकरण करने के लिए. शायद ऐसे भारत का सपना बापू ने नहीं देखा था कि किसी गरीब को पहनाया गया कपड़ा उनके शरीर से उतारा जाएगा. वैसे ये केवल कांग्रेस की बात नहीं है. बापू के नाम पर राजीति करने वाले बहुत से दल हैं इस भारत में.

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