राम मंदिर शुरु से ही उत्तर प्रदेश की सियासत के लिए एक बड़ा मुद्दा रहा है. जब भी कोई राज्य में चुनाव नजदीक आता हैं तो पार्टीयां राम मंदिर बनाने के नाम पर वोट हणपने के लिए लोगों को तरह-तरह के टॉनिक देती हैं. और इन टॉनिकों को कई बार यूपी की जनता ने पी भी लिया है लेकिन फिर भी कोई फायदा दिखता हुआ नजंर नहीं आया.

वैसे तो सुप्रीम कोर्ट में 29 अक्टूबर से राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़ी विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर सुनवाई शुरू होनी है. मगर इससे पहले ही राम मंदिर के निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद यानि की वीएचपी ने तेवर कड़े कर लिए, जिसे लेकर वीएचपी ने राम मंदिर के निर्माण के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरना शुरु कर दिया है.

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बता दें कि विश्व हिंदू परिषद से जुड़े देश के करीब 40 बडे संतों ने शुक्रवार को दिल्ली में बैठक करके राम मंदिर के निर्माण को लेकर आगे की रणनीति तय की है. संतों की उच्चाधिकार समिति के साथ बैठक में कई संतों ने राम मंदिर के निर्माण पर केंद्र सरकार के रूख पर नाराजगी जताते कहा कि अगर मोदी सरकार कोर्ट में पेंडिग होने के बाद एससी/एसटी एक्ट को संसद में कानून बना सकती है, और तीन तलाक बिल पर अध्यादेश ला सकती है, तो राम मंदिर के निर्माण के लिए ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता.

इसी दौरान आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद ने बैठक में कहा कि देशभर में लोग पूछते हैं कि क्या सोच कर आप लोगों ने मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाया, मंदिर तो बना ही नहीं. उन्होने कहा कि रामलीला मैदान में सभा हो, और मोदी जी को उसमें बुलाया जाए.

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बैठक के दौरान कई संतों ने ये भी याद दिलाया कि 1989 में पालनपुर में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया था कि केंद्र में जब भी उनकी सरकार आएगी तो वह राम मंदिर निर्माण जरुर कराएगें, लेकिन संतों की ओर से ये शिकायत की गई कि पिछले 20 साल में दो बार केंद्र में बीजेपी नेतृत्व की सरकार बन चुकी हैं लेकिन अभी तक राम मंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिग में पड़ा हुआ है.

संतों ने ये भी कहा कि अगर केंद्र सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए कानून नहीं बनाती है तो वीएचपी संतों की उच्चाधिकार समिति के नेतृत्व में हिंदू समाज एक बार फिर मंदिर के निर्माण के लिए आंदोलन का रास्ता अपनायेगा.

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