भारत की आजादी के बाद से ही कश्मीर एक प्रमुख मुद्दा रहा है। आजादी के बाद काफी संघर्ष के बाद कश्मीर का भारत में विलय हुआ था। कश्मीर के तत्कालीन राजा हरि सिंह ने भारत सरकार के साथ करार के बाद कश्मीर के विलय पत्र पर हस्ताक्षर किया था।

कश्मीर का भारत में विलय के वक्त तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के हस्तक्षेप के बाद कश्मीर के लिए भारतीय संविधान की धारा 370 के तहत विशेष उपबन्ध जोड़े गए थे। अब फिर से जम्मू-कश्मीर के धारा 370 और अनुच्छेद 35ए पर बहस छिड़ गई है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष एवं सांसद फारुख अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से अनुच्छेद 35 ए पर अपना रूख साफ करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी तबतक पंचायत चुनाव में भाग नहीं लेगी जबतक अनुच्छेद 35ए पर केंद्र और राज्य सरकार अपनी स्थिति साफ नहीं करती।

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बता दें कि इससे पहले भी अलगाववादियों ने जम्मू-कश्मीर में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव का बहिष्कार करने को कहा था। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी धारा 370 और अनुच्छेद 35ए पर सरकार को चेतावनी दी थी।

दूसरी ओर केंद्र सरकार पर कई गलतियां करने का आरोप लगाते हुए अबदुल्ला ने कहा कि लोगों का दिल जीतने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब-जब अनुच्छेद 35ए को हटाने जैसे मुद्दे उठते हैं, तब-तब लोगों को ठेस पहुंचती है। उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अनुच्छेद 35ए को हटाने की क्या जरूरत है?

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