भारतीय लोकतंत्र में ये 27वीं बार है, जब किसी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ ये अविश्वास प्रस्ताव टीडीपी यानी तेलगुदेशम पार्टी ने लाया है। मोदी सरकार के खिलाफ 4 साल में लाया गया ये पहला अविश्वास प्रस्ताव है, जिसपर सदन में आज चर्चा होगी और वोटिंग भी। ज्यादातर विपक्षी पार्टियां इस अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन दे चुकी हैं।

No Confidence motion in hindi
Sansad Bhawan

सदन में विश्वास और अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है। अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion)- सरकार का विरोध करने वाले विपक्षी दल लाते हैं। इसे लोकसभा या फिर राज्यों की विधानसभाओं में लाया जा सकता है। सरकार बने रहने के लिए इस प्रस्ताव का गिरना जरूरी होता है। इसे पेश करने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। ये सिर्फ लोकसभा में ही लाया जा सकता है। इसे राज्यसभा में कभी पेश नहीं किया जा सकता।
विश्वास प्रस्ताव- केंद्र में प्रधानमंत्री और राज्य में मुख्यमंत्री इसे पेश करते हैं। सरकार के बने रहने के लिए इस प्रस्ताव का मंजूर होना जरूरी है। प्रस्ताव पारित नहीं हुआ तो सरकार गिर जाती है। ये प्रस्ताव दो स्थिति में लाया जाता है, पहली जब सरकार को समर्थन देने वाली पार्टियां समर्थन वापसी ले लें, ऐसे में राष्ट्रपति या राज्यपाल प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को सदन का भरोसा हासिल करने को कह सकते हैं। दूसरा जब चुनाव के बाद कोई पार्टी अल्पमत में हो लेकिन वो सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाने का दावा पेश करे।

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No Confidence motion in hindi pandit nehru
Pandit Jawahar Lal Nehru

ये पहली बार नहीं है, जब किसी सरकार के खिलाफ ये प्रस्ताव लाया गया हो। भारतीय इतिहास में पहला अविश्वास प्रस्ताव चीन से युद्ध हारने के बाद तत्कालीन नेहरू सरकार के खिलाफ लाया गया था। हालांकि 1963 में आया ये प्रस्ताव कम वोटों की वजह से गिर गया था। अब तक सबसे ज्यादा 15 बार अविश्वास प्रस्ताव इंदिरा सरकार के खिलाफ लाए गए थे। लेकिन इन अविश्वास प्रस्तावों के बावजूद अब तक एक ही बार सरकार गिर पाई है। 1978 में मोरारजी देसाई की सरकार अविश्वास प्रस्ताव की वजह से गिर गई थी।

अविश्वास प्रस्ताव विपक्षी पार्टी ही लाती है जबकि विश्वास प्रस्ताव सरकार अपना बहुमत साबित करने के लिए लाती है।अटल बिहारी वाजपेयी ने दो बार सदन में विश्वास मत रखा लेकिन बहुमत हासिल नहीं कर पाए। 1996 में उन्होंने वोटिंग से पहले ही इस्ताफा दे दिया था, जबकि 1998 में सिर्फ एक वोट से उनकी सरकार गिर गई थी।

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No Confidence motion in hindi pm modi tweets
Modi tweets after No confidence motion

आपको बता दें, लोकसभा स्पीकर के प्रस्ताव मंजूर करने के बाद पीएम ने ट्वीट में लिखा, ‘आज हमारे संसदीय लोकतंत्र का एक महत्‍वपूर्ण दिन है… मुझे यकीन है कि हमारे साथी सांसद और सहयोगी इस अवसर पर उभरेंगे और व्‍यापक और व्‍यवधान मुक्‍त बहस सुनिश्‍चित करेंगे… हम इसके लिए लोगों और हमारे संविधान के निर्माताओं को इसका श्रेय देते हैं. भारत हमें बारीकी से देखेगा।’

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