46 साल पहले आज के ही दिन, 2 जुलाई 1972 को भारत और पाकिस्तान के बिच करार लिखा गया था, जिसे हम शिमला समझौता के नाम से जानते हैं। वो समझौता जिसमें पाकिस्तान ने घुटने टेककर भारत से हाथ मिलाया था। वो समझौता जिससे एक राष्ट्र को दूसरे राष्ट्र ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया था। वो समझौता जो शांति के लिए था। लेकिन क्या आपको पता है, कि आखिर इस समझौते की ज़रूरत क्यों पड़ीं और इस समझौते में आखिर ऐसा क्या था ?

Agreement on Making of Bangladesh

बात 1971 की है, पाकिस्तान ने पनपे गृहयुद्ध के हालात के बाद पाकिस्तान ने भारत को आंख दिखाने को कोशिश की थी। जिसका जवाब भारत ने ऐसा दिया, कि वो पाकिस्तान के लिए सबक और दुनिया के लिए एक इतिहास बन गया। दरअसल 1971 में हुए युद्ध में पाकिस्तान को भारत के हाथों को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। इस युद्ध के बाद पाकिस्तान का काफी नुकसान भी हुआ था। सिर्फ 13 दिन के युद्ध में भारत ने पकिस्तान के 90,000 सैनिकों को बंदी बना लिया था। वैसे तो भारत ने शुरुआत में युद्ध ना करने का फैसला लिया था। लेकिन, पाकिस्तानी सेना की बर्बर कार्रवाई के बाद, पूर्वी पाकिस्तान से लगभग 1 करोड़ लोग भारत भागकर आए थे, जिसके बाद पाकिस्तानी फ़ौज ने भारत के पश्चिमी एयरफील्ड्स को निशाना बनाया। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान से औपचारिक युद्ध का एलान कर दिया।

जरुर पढ़ें:  हवस के भेड़ियों का कहर-लड़कियां इज्ज़त बचाने के लिए मुंह पर कालिख पोतती हैं

भारत ने जल, थल, और वायु तीनों सेनाओं का इस्तेमाल कर पाकिस्तान को उसकी नानी याद दिला दी। पाकिस्तानी सेना भारतीय फ़ौज के सामने टिक नहीं पायी और 4 दिसंबर 1971 को शुरू हुआ ये युद्ध 16 दिसंबर 1971 को ही खत्म हो गया। पाकिस्तान ने भारत के सामने घुटने टेक दिए थे। युद्ध खत्म होने के बाद पाकिस्तान पूरी तरह से टूट चुका था, इसलिए उसने अपनी परेशानियों को कम करने के लिए भारत के सामने हाथ फैलाए। इसी के तहत भारत शिमला समझौते के लिए तैयार हुआ। और दो जुलाई को दोनों देशो के प्रमुख नेताओं के साथ ही बड़े अधिकारियों ने इसपर दस्तखत किए।

जरुर पढ़ें:  मॉडल के लिए हाथ-पैरों के बाल बने मुसीबत, मिली रेप की धमकी
Agreement in between Indian Army and Pakistan Army

इस समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध बंदियों की न सिर्फ अदला-बदली हुई, बल्कि भारत ने पाकिस्तान की उस ज़मीन को भी वापस कर दिया, जिसपर युद्ध के दौरान कब्जा किया गया था। साथ ही साथ इस समझौते के बाद पाकिस्तान ने बांग्लादेश को आधिकारिक राष्ट्र भी मान लिया। समझौते में दोनों देशों के बीच व्यापार जल्द से जल्द शुरू करना। आगे दोनों देशों के बीच आने वाली किसी भी समस्या का सामाधान सीधी बातचीत से करना। कश्मीर की नियंत्रण रेखा को तय करना जैसे मुद्दे शामिल थे। भारत की ओर से इस समझौत पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने हस्ताक्षर किए थे, जबकि पाकिस्तान की ओर से जुल्फीकार अली भुट्टो शामिल हुए थे।

जरुर पढ़ें:  माया फिर चुनी गईं बसपा अध्यक्ष, उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों का ऐलान
Agreement between India-Pakistan (Shimla Agreement)

बड़े बुजुर्ग कह गए हैं, कि ‘कुत्ते की पूंछ कभी सीधी नहीं हो सकती’। पाकिस्तान के मामले में। ये कहावत बिलकुल ठीक बैठती है। समझौते के तुरंत बाद ही। पाकिस्तान ने अपनी दुम को फिर टेढ़ा कर लिया। पाकिस्तान ने समझौते को तब तक ही समझौता माना था जब तक पाकिस्तानी बंदि वापस मिल गए और भारत ने कब्ज़े वाली ज़मीन से अपनी सेना को वापस बुला लिया। इसके बाद पाकिस्तान अपनी दोगली नीती पर उतर आया और आज तक उसी ढर्रे पर चल रहा है। पाकिस्तान आज भी भारत में आतंकवाद को प्रायोजित कर रहा है। वो कश्मीर में युवाओं को भड़का रहा है और नियंत्रण रेखा पर तनाव की वजह भी बन रहा है।

Loading...