आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी जीत हुई, जब के ISIS मास्टरमाइंड अबु बकर अल बगदादी को अमेरिकी सेना ने मौत के घाट उतार दिया. जिस बगदादी से पूरी दुनिया खौफ खाती थी, उसी बगदादी को कुत्ते की मौत मिली. अपने आखिरी दिनों में बगदादी रोया, गिड़गिड़ाया लेकिन उसे उसके कर्मो की सजा मिली.

एक टाइम था जब बगदादी का आतंक अपने चरम पर था. उसका नाम सुनकर भी लोग कांपते थे. उस वक्त भी उसे अपने ही गढ़ में चुनौती मिली थी, और  ये चुनौती दी थी कुर्द की महिला मर्दानियों ने. सब जानते हैं कि ISIS संगठन ने आंतक फैलाने के लिए महिलाओं का सहारा लिया, उनका शोषण किया. लेकिन दूसरी तरफ कुर्द की इन मर्दानियों ने ISIS अपना बोरिया बिस्तर उठाने को मजबूर कर दिया.

2014 से ही इन महिलाओं ने न सिर्फ ISIS  आतंकियों को पीछे धकेले रखा, बल्कि उत्तरी सीरिया में टिगरिस नदी के पास अपने गढ़ पर बगदादी की सत्ता कायम नहीं होने दी. बगदादी के आतंकियों ने जब सीरिया में कुर्द बहुल इलाकों की तरफ रुख किया तो बड़ी तदाद में महिला फाइटर्स ‘पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट’ से जुड़ने लगीं. ये पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी की सैन्य शाखा है.

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और इस कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी का मकसद है तुर्की, इराक और सीरिया के तुर्क बहुल इलाकों को मिलाकर अलग देश कुर्दस्तान का स्थापना करना. जिसका ये सारे देश विरोध ही करते हैं. सीरिया में जब बगदादी अपनी ताकत बढ़ाने लगा तो इसकी तपिश से कुर्द भी प्रभावित हुए. इस मुश्किल घड़ी में अपनी सरजमीं की रक्षा करने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं सेना में शामिल हुईं. महिलाओं की शक्ति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सीरियाई कुर्द बलों का एक तिहाई हिस्सा महिलाओं का है. एक अनुमान की माने तो कुर्द सेना में महिलाओं की संख्या 7 से 10 हजार के बीच है जिसमें 18 से 25 साल की महिलाएं शामिल है.

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अगस्त 2014 में जब ISIS  इराक के सिंजर में आगे बढ़ने लगा था तब IS आतंकी बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक यजीदियों को निशाना बनाकर मारने लगे थे. उस वक्त बगदादी के खिलाफ इन कुर्दिश मर्दानियों ने काउंटर ऑफेंसिव शुरू किया. हजारों की यजीदी अबादी को इनके कब्जे से मुक्त कराया. इस संघर्ष के बाद ISIS के खिलाफ इनकी जंग जारी है.

साल  2017 में कुर्दिश महिला लड़ाकों ने एक ऐसी महिला को ISIS  आतंकियों के चंगुल से आजाद कराया था जो पांच बार बेची-खरीदी गई थी. ISIS यही करता था यजीदियों के ठिकानों पर हमला करके मर्दों को गोली मार देता था और  महिलाओं को गुलाम बना लेता था. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 इस टीम ने ISIS आतंकियों के ठिकाने पर छापा मारकर 200 महिलाओं और बच्चों को आजाद कराया था.

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बगदादी के खिलाफ जंग में इन महिलाओं को दो मोर्चे पर लड़ना पड़ा. एक तो इनके सामने ISIS जैसा खतरनाक दुश्मन था, दूसरा अगर कभी-कभार ये महिला फाइटर्स बगदादी के गुर्गों के कब्जे में आ जातीं तो उन्हें यौन हिंसा का शिकार होना पड़ जाता. आतंकियों के कब्जे में आई महिलाओं की जिंदगी नरक के समान हो जाती थी. कई बार इन्हें तब तक सेक्स स्लेव बने रहना पड़ता था, जब तक इनकी मौत न हो जाती थी. बता दें, ISIS की तरह कुर्द की ये मर्दानियां भी सुन्नी इस्लाम को मानती हैं. लेकिन इनके समाज और महिलाओं को लेकर आजाद ख्याल है और इन्हें उम्मीद है कि रणभूमि में मोर्चा संभालने के बाद इनका समाज इन्हें बराबरी में स्वीकार करेगा.

वाकई इन मर्दानियों के जज्बे को सलाम है जिन्होंने बगदादी जैसे खुंखार आंतकी के सामने कभी घुटने नहीं टेके.

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