दिवाली नज़दीक है और लोग इस बड़े त्योहार को धूमधाम से मनाने के लिए मार्किट का रुख कर रहे हैं. लोग खरीदारी में नए कपड़े, पूजा का सामान, साज-सजावट का सामान, पटाखें खरीद रहे हैं. लेकिन पटाखों को लेकर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला दिया है.
जी हाँ 23 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला सुनाया, कि दिवाली के दिन रात के 8 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक सिर्फ दो घंटे ही पटाखे चलाए जा सकेंगे और कोर्ट का ये आदेश पूरे देश में एक समान लागू होगा. इसके अलावा कोर्ट ने पटाखों को लेकर और भी कई दिशा-निर्देश दिए हैं, जिन्हें आप यहां पढ़ सकते हैं.
लेकिन क्या आपको पता है, कि कोर्ट ने ये जो आदेश दिया है, उसके पीछे वजह तीन बच्चे हैं. जीहां ये फैसला इन्हीं तीनों की वजह से सुनाया गया है. इन बच्चों की उम्र महज़ 6 महीने से लेकर 14 महीने की थी.
सिलसिला शुरू होता है अक्टूबर 2015 से. दिल्ली के रहने वाले तीन बच्चे अर्जुन गोपाल, आरव भंडारी और जोया राव दिवाली के बाद दिल्ली में हुए प्रदूषण की वजह से बीमार पड़ गए थे. करीब दो हफ्ते तक ये पॉल्यूशन रहा और इन दो हफ्तों तक बच्चों की हालत खराब रही और बच्चे पूरी तरह से सुस्त हो गए थे. लेकिन जब दिल्ली में प्रदूषण थोड़ा कम हुआ तो ये बच्चे ठीक हो गए.

इसके बाद बच्चों के घरवालों ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी. इस याचिका में कहा गया था कि दिल्ली में पॉल्यूशन की वजह से हालात खराब होते जा रहे हैं. दिल्ली में दिवाली के दौरान पटाखों की वजह से पॉल्यूशन और भी बढ़ जाता है और इसकी वजह से बच्चों को फेफड़ों की बीमारियां हो जाती हैं.
बता दें बच्चों के परिवार वालों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की वकील ने कहा था, कि भारत के संविधान के आर्टिकल 21 के अनुसार सभी नागरिकों को जीवन और व्यक्तिगत आज़ादी की रक्षा का अधिकार देता है.
दशहरे और दिवाली के दौरान पटाखों की वजह से छोटे बच्चों को अस्थमा और फेफड़ों की बीमारियां होने का खतरा रहता है. ऐसा इस वजह से होता है कि नवजात के फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं होते औरबीमारियों से लड़ने की उनकी ताकत भी काफी कम होती है. बता दें तीन साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने इन तीन बच्चों की याचिका पर 23 अक्टूबर को फैसला सुनाया. फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर पूरी तरह से बैन लगाने से इन्कार कर दिया, लेकिन ऐसी व्यवस्था करने का आदेश दिया कि पॉल्यूशन कम से कम हो. आपको बता दें इंसान ही नहीं बल्कि पटाखों से जानवरों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

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