एक संत हैं, महात्मा हैं, जो अभी हाल ही मे जेल की सलाखों के पीछे गए हैं, जिनका नाम है स्वामी चिन्मयानंद. वैसे इन जैसे कई बाबा जेल में पहले भी गए हुए हैं ये कोई नए नहीं हैं. ऐसे बाबाओं कि जमात हिन्दुस्तान मे बहुत बड़ी है लेकिन आज हम आपको स्वामी चिन्मयानंद के बारे मे ही बताएंगे कि इन्होंने इतना बड़ा सम्राज्य स्थापित कैसे कर लिया. कई सवाल हैं जिनका जवाव भी हम आपको देंगे कि स्वामी चिन्मयानंद कौन हैं? वे कहां से आए हैं? राजनीति में आने से पहले क्या करते थे? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना करीबी बताने वाले चिन्मयानंद देश के गृह राज्यमंत्री कैसे बने और शाहजहांपुर में अपना इतना विशाल साम्राज्य कैसे खड़ा किया?

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स्वामी चिन्मयानंद का जन्म 3 मार्च 1947 को यूपी के गोंडा जिले में हुआ था. वे अवध के राजघराने से ताल्लुक रखते हैं. लोग इन्हें स्वामी चिन्मयानंद के नाम से जानते हैं, वैसे इनका असली नाम कृष्णपाल सिंह है. चिन्मयानंद ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए किया है. 20 साल कि उम्र मे चिन्मयानंद दिल्ली आए थे फिर वापस घर नही गए थे. घर छोड़ दिया था. लोग कहते है कि चिन्मयानंद दिल्ली 26 जनवरी की झाकियां देखने गए थे और फिर कभी नहीं लौटे. कहा तो ये भी जाता है कि युवावस्था में चिन्मयानंद ने बुद्ध और महावीर से प्रभावित होकर राजघराने से अपना ताल्लुक तोड़ लिया था.

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चिन्मयानंद ने भाजपा के टिकट पर पहली बार उत्तर प्रदेश की बदायूं लोकसभा सीट से 1991 में चुनाव जीता और फिर कभी राजनीति में पीछे मुड़कर नहीं देखा. इसके सात साल बाद 1998 में वे यूपी के मछलीशहर और 1999 में जौनपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए और फिर चिन्मयानंद बीजेपी के कदावर नेताऔ मे शुमार हो गए. इसके बाद वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री भी बने. सांसद और मंत्री रहने के अलावा चिन्मयानंद ने राम मंदिर आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इस आंदोलन में चिन्मयानंद ने गोरखपुर की गोरक्षा पीठ के महंत और पूर्व सांसद अवैद्यनाथ के साथ मिलकर बड़ी भूमिका निभाई थी. वो ही अवैद्यनाथ जो उत्तरप्रदेश के मौजुदा मुख्यमंत्री योगी अदित्तयनाथ के गुरु माने जाते है और यही कारण है कि चिन्मयानंद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना करीबी बताते है. बात तो ये भी सामने आई थी की जब 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली तो वो चिन्मयानंद ही थे जिन्होंने मुख्यमंत्री के पद के लिए योगी आदित्यनाथ का नाम आगे किया था.

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खैर अब वो अपने ही लॉ कॉलेज की एक छात्रा के द्वारा लगाए दुष्कर्म के आरोपों के आधार पर गिरफ्तार किए जा चुके है. अब वो सलाखो के पिछे है, इससे पहले साल 2011 में भी एक महिला ने उन पर ऐसे ही आरोप लगाए थे.

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