किसानों पर देश में होने वाली सियासत किसी से छिपी नहीं है. हर राजनीतिक दल किसानों का मसीहा बनने का दावा करता है. और उनके लिए घड़ियाली आंसू बहाता हुआ दिखाई देता है. लेकिन किसानों की हालत क्या है ये उनकी फसल बिक्री के वक्त समझा जा सकता है. हाल ही में किसानों के प्याज की बिक्री का सीजन है. लेकिन बाज़ार में साल भर तीस रुपए किलो बिकने वाला प्याज किसानों से सिर्फ एक रुपए किलो खरीदा जा रहा है.

ऐसे में किसानों ने इसकी गूंज सरकार तक पहुंचाने के लिए अनोखा तरीका अपना लिया है. आपको बता दें कि देश में सबसे ज्यादा प्याज की खेती महाराष्ट्र के नाशिक में होती है और यहीं पर प्याज की बंपर पैदावार भी होती है. भारत में प्याज के कुल उत्पादन में से करीब 50 फीसदी प्याज का उत्पादन महाराष्ट्र के नासिक जिले में होता है. लेकिन यही प्याज अब किसानों के आंसू निकाल रहा है.  

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महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के एक किसान ने प्याज की कीमतों में आई जबर्दस्त गिरावट और प्याज बेचने के एवज में मिलने वाली मामूली रकम को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने की खातिर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीसको छह रुपए का मनी ऑर्डर भेजा है.

श्रेयस अभाले नाम के किसान ने रविवार को बताया कि जिले के संगमनेर थोक बाजार में 2657 किलो प्याज एक रुपए प्रति किलो के भावसे बेचने और उसको बाजार ले जाने का खर्च निकालने के बाद उसके पास महज छह रुपए बचे. जिससे उसको काफी निराशा हुई इसलिए उसने ये छह रुपए का मनी ऑर्डर  मुख्यमंत्री को भेजने का फैसला कर लिया है. ताकि सीएम को भी पता चल सके कि किसान किस मुसीबत में है.

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इससे पहले भी महाराष्ट्र के नाशिक के एक किसानने प्याज बिक्री के रुपए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे थे. इस चीज का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संज्ञान भी लिया और महाराष्ट्र सरकार से रिपोर्ट तलबकी है.

आपको बता दें कि नाशिक जिले के निफाड़ तहसील के किसान संजय साठे 750 किलो प्याज बाज़ार में बेचे थे. जिसके एवज में उसे महज 1,064 रुपए मिले थे. जिससे खफा किसान ने 1,064रुपए प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में  भेजदिए थे.

इस हालत पर नासिक जिले के रेजिटेंट कलेक्टर ने बताया कि इस साल जिले में प्याज की बंपर पैदावार हुई है. इसलिए ये हालत हुई है. इधर मध्यप्रदेश में भी प्याज  किसानों का आंसू निकाल रहा है. सही कीमत न मिलने की वजह से किसान प्याज सड़कों पर फेंकने को मजबूर है. आपको क्या लगता है राजनीतिक दल सिर्फ किसानों के नाम पर राजनीति करते हैं.

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