जम्मू-कशमीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का सिलसिला जारी है. और इसके बाद से ही पाकिस्तान पर भारत के साथ कई देशों का दबाव बना हुआ है. पुलवामा हमले का जिम्मेदार पाकिस्तान की सरज़मीं पर पल रहा जैश-ए-मोहम्मद है. इस बात का खुलासा होने के बाद से ही भारत ने पाकिस्तान पर दबाव बनाया हुआ है. और इस संगठन को घेरने की कोशिशों में लगा हुआ है.

वहीं इन कोशिशों का असर भी अब दिखने लगा है. जी हां, पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा जैसे संगठनों पर बैन लगा दिया है. बता दें कि इससे पहले भी ऐसे कई मौके आए हैं. जब उसने इन संगठनों पर बैन लगाया है. जिसके चलते शक की एक सूई पाकिस्तान की ओर अब भी अटकी हुई है. सवाल ये उठ रहा है कि आतंकी संगठनो को लेकर ये कार्रवाई क्या पाकिस्तानियों का कोई दिखावा तो नही. या हकीकत में वो अपनी जिम्मेदारियों पर सख्ती बरत रहा है.

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पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने जैश के बचाव में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था की जैश ने इस हमले की जिम्मेदारी नही ली है, ये सिर्फ एक भ्रम है. हालांकि इस मुद्दे को भारत ने अंतराष्ट्रीय मंच पर साबित कर दिया था. जिसके बाद से दुनिया के कई देशों ने पाकिस्तान पर आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करने को कहा, ना सिर्फ देश बल्कि संयुक्त राष्ट्र, FATF, UNSC की तरफ से भी पाकिस्तान पर दबाव था. यही वजह है कि उसने तुरंत एक्शन लिया और 44 संगठनों पर बैन लगाया और कुछ को हिरासत में भी लिया.

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वही दूसरी ओर पाकिस्तान के ही कुछ लोग इस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं. कई लोगों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा है कि हम इस तरह के बैन-कार्रवाई पहले भी देख चुके हैं. अब ऐसे में इस कार्रवाई को ठोस माना जाए ऐसा तो कोई पुख्ता सबूत सामने नही आया.

 

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