पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को लेकर पिछले कुछ दिनो से दूसरे देशो के दरवाजे पर गिड़गिड़ा रहा था लेकिन किसी ने भी उसकी नही सुनी. एक बार तो चीन ने भी साथ छोड़ दिया था फिर ज्यादा मिन्नत करने पर चीन ने पकिस्तान कि बात सुन ली लेकिन उससे भी कुछ नहीं होने वाला. पाकिस्तान ने UNSC यानी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को खत भेजा. खत में लिखा कि एक बार हमारी बात सुन लिजिए. चीन का साथ है और चीन UNSC मे स्थाई सदस्य है तो UNSC ने आग्रह स्वीकार किया और  शुक्रवार को बैठक बुला ली लेकिन एक शर्त पर. वो शर्त ये थी की बैठक बंद दरवाजे में होगी मतलब बैठक क्लोज डोर मे होगी.

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ऐसा कभी नहीं हुआ कि संयुक्त राष्ट्र जैसी मुखिया संस्था को बंद दरवाजे के पीछे बैठक करनी पड़े. दरअसल चीन स्थाई सदस्य है तो उसकी बात पूरी करने और मात्र औपचारिकता के लिए ये बैठक बुलाई गई है. इसलिए UNSC ने बैठक बंद कमरे मे बुलाई है. अगस्त महीने मे पौलेंड UNSC कि अध्यक्षता करता है और वो पहले ही कह चुका है कि कश्मीर मसला भारत पाकिस्तान का है वो अपने आप सुलझाए. इस बैठक से कोई भी भारत का बाल भी बांका नहीं कर सकता क्योंकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लगभग सभी सदस्यों ने भारत का समर्थन किया है.

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में कुल 15 सदस्य हैं. इनमें 5 स्थाई और 10 अस्थाई हैं, 5 स्थाई सदस्यों में से चीन को छोड़कर बाकी सभी देशों- फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका ने पाकिस्तान को ठेंगा दिखा दिया है. इससे भारत कि विजय तय है. संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में यह दूसरा मौका है, जब कश्मीर मुद्दे पर कोई बैठक होने जा रही है. पहली बैठक 1971 मे हुई थी. पहली बैठक और इस बेैठक मे बहुत अंतर है. पहली बैठक ना ही तो बंद दरवाजे मे हुई थी और ना ही सुरक्षा परिषद् के सदस्य देशों ने पाकिस्तान को यूं अकेला छोडा था. इस बार तो पाकिस्तान को चीन के आलावा किसी भी देश ने थोड़ा भी साथ नही दिया. यूएनएससी में 1969-71 में ‘सिचुएशन इन द इंडिया/पाकिस्तान सबकॉन्टिनेंट’ विषय के तहत कश्मीर का मुद्दा उठाया गया था.

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